भारत के कूटनीतिक संबंधों को मार्गदर्शित करने वाले पांच मुख्य सिद्धांत | Current Affairs | Vision IAS

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भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा, क्षेत्रीय संघर्षों और आर्थिक पुनर्संरचना की वजह से बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच भारत की कूटनीति को पांच प्रमुख रणनीतिक सिद्धांतों द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए।

भारत के कूटनीतिक संबंधों के पांच मुख्य सिद्धांत:

  • पारस्परिकता (Reciprocity): भारत की विदेश नीति अपने रणनीतिक भागीदारों के साथ आपसी सहयोग और विश्वास पर आधारित होनी चाहिए।
    • उदाहरण: वर्तमान अमेरिका-ईरान संघर्ष के बावजूद, भारत के प्रधानमंत्री संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का दौरा कर रहे हैं। गौरतलब है कि UAE ने कश्मीर और आतंकवाद के खिलाफ जैसे मुद्दों पर लगातार भारत का समर्थन किया है।
  • विविधीकरण (Diversification): भारत को रणनीतिक मामलों में या उत्पादों के लिए कुछ विशेष देशों पर अधिक निर्भरता कम करने और नए अवसर प्राप्त करने के लिए पारंपरिक साझेदारियों से आगे बढ़कर कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों का विस्तार करना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: व्यापार, अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रकों में यूरोप के साथ सहयोग बढ़ाना।
  • रणनीतिक लचीलापन (Strategic Flexibility): भारत को बदलते वैश्विक शक्ति समीकरणों और विकसित होते नए भू-राजनीतिक गठबंधनों के बीच एक व्यावहारिक और हित-आधारित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
    • उदाहरण के लिए: ब्रिक्स और क्वाड, दोनों मंचों में भारत की अहम भागीदारी है।
  • अपने रणनीतिक-हित क्षेत्रों का विस्तार: भारत को आर्थिक और भू-राजनीतिक महत्व वाले उभरते क्षेत्रों के साथ अपने संबंधों को सुदृढ़ करना चाहिए, ताकि बाजार, संसाधन और संपर्क (कनेक्टिविटी) सुनिश्चित किए जा सकें।
    • उदाहरण के लिए: व्यापार, अति-महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और विकास साझेदारी के क्षेत्रकों में भारत-अफ्रीका सहयोग का बढ़ना।
  • घरेलू क्षेत्र में सुधार करना: प्रभावी कूटनीति के लिए सुदृढ़ घरेलू अर्थव्यवस्था, तकनीकी क्षमता और संस्थागत स्तर पर सुधार आवश्यक हैं, ताकि वैश्विक अनिश्चितताओं से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
    • उदाहरण के लिए: विनिर्माण, नवाचार और प्रौद्योगिकी के स्तरों पर आत्मनिर्भरता प्राप्त करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
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कनेक्टिविटी (Connectivity)

भौगोलिक, आर्थिक, डिजिटल और सांस्कृतिक रूप से देशों के बीच सुगम आवागमन और संपर्क को बेहतर बनाने की प्रक्रिया। भारत अपनी पड़ोस नीति में कनेक्टिविटी में सुधार को एक प्रमुख लाभ के रूप में देखता है।

अति-महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals)

वे खनिज जो आर्थिक विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं, लेकिन जिनकी आपूर्ति श्रृंखला में जोखिम या व्यवधान का खतरा होता है।

क्वाड (QUAD)

क्वाड, जिसे चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quadrilateral Security Dialogue) भी कहा जाता है, चार देशों - भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका - के बीच एक अनौपचारिक रणनीतिक संवाद मंच है। इसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मुक्त, खुले और समावेशी व्यवस्था को बढ़ावा देना है, जिसमें समुद्री सुरक्षा, अवसंरचना विकास और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों पर सहयोग शामिल है।

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