बाबा बंदा सिंह बहादुर (1670-1716)

12 मई को सरहिंद फतेह दिवस मनाया गया।
- 1710 में बाबा बंदा सिंह बहादुर द्वारा सरहिंद की ऐतिहासिक जीत की स्मृति में प्रत्येक वर्ष सरहिंद फतेह दिवस मनाया जाता है।
बाबा बंदा सिंह बहादुर के बारे में
- वे एक महान सिख योद्धा और खालसा सेना के कमांडर थे।
- उनका जन्म वर्तमान जम्मू-कश्मीर के राजौरी क्षेत्र में हुआ था। उनके बचपन का 'लछमन देव' था।
- बाद में वे श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के शिष्य बने और उन्हें 'बंदा सिंह बहादुर' के नाम से जाना गया।
प्रमुख योगदान:
- सैन्य उपलब्धियां: उन्होंने मुगलों को पराजित किया और उत्तर भारत के बड़े हिस्सों को दमनकारी मुगल शासन से मुक्त कराया।
- प्रशासनिक और सामाजिक सुधार:
- जमींदारी प्रथा का उन्मूलन किया।
- काश्तकारों को सीधे संपत्ति का अधिकार प्रदान किए।
- आर्थिक सुधार: सिख संप्रभुता के प्रतीक के रूप में 'नानकशाही सिक्के' जारी किए गए।
शहादत:
- उन्हें मुगल बादशाह फर्रुखसियर ने बंदी बना लिया था।
- अत्यधिक यातनाओं के बावजूद उन्होंने धर्म परिवर्तन करने से इनकार कर दिया।
- उन्होंने महरौली (दिल्ली) में शहादत प्राप्त की, जहां उनकी स्मृति में एक स्मारक बना हुआ है।
- जीवन मूल्य: साहस, बलिदान, आदि।