डिजिटल कृषि मिशन (DAM) - Ministry of Agriculture & Farmers Welfare | Current Affairs | Vision IAS

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डिजिटल कृषि मिशन (DAM)

अद्यतन: 28 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Agriculture & Farmers Welfare
लाभार्थी: Farmers

अवलोकन

उद्देश्य: एक समग्र डिजिटल कृषि इकोसिस्टम का विकास करना, जो किसानों को समय पर सटीक फसल और कृषि संबंधी जानकारी तथा नवीन तकनीकी समाधान प्रदान करना।

स्मरणीय तथ्य 

  • उद्देश्य: एक समग्र डिजिटल कृषि इकोसिस्टम का विकास करना, जो किसानों को समय पर सटीक फसल और कृषि संबंधी जानकारी तथा नवीन तकनीकी समाधान प्रदान करना।
  • योजना का प्रकार: यह केंद्रीय क्षेत्रक की एक योजना है। हालांकि, इसके तहत 'राज्यों/ संघ शासित प्रदेशों को प्रदान की जाने वाली सहायता' घटक केंद्र प्रायोजित है।
  • अपेक्षित लाभार्थी: किसान 
  • कार्यावधि: 5 वर्ष यानी वित्त-वर्ष 2021-22 से वित्त वर्ष 2025-26 तक। 

अन्य उद्देश्य

  • सरकारी कार्यक्रमों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए किसान-केंद्रित डिजिटल इकोसिस्टम का निर्माण करना। 
  • तथ्यों/ आंकड़ों के आधार पर निर्णय लेने में सरकार की सहायता करना।
  • कृषि-प्रौद्योगिकी में सार्वजनिक और निजी क्षेत्रक में नवाचार एवं साझेदारी को बढ़ावा देना।

प्रमुख विशेषताएं 

पृष्ठभूमि:

  • 2010-11  में कृषि में राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGPA)  की शुरुआत सूचना व संचार प्रौद्योगिकी (ICT) का उपयोग करके की गई थी। इसका उद्देश्य समय पर कृषि संबंधी जानकारी प्रदान करना था। इसे 2020-21 में डिजिटल तकनीकों को अपनाने के लिए अपडेट किया गया था।
  • डिजिटल कृषि मिशन (DAM) अब सरकारों एवं संस्थानों द्वारा डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, फसल अनुमान और IT परियोजनाओं जैसी पहलों का समर्थन करता है।.

डिजिटल कृषि मिशन के तहत कार्यक्रम और योजनाएं:

  • एग्री स्टैक (किसान की पहचान): यह किसानों को दक्ष सेवाएं प्रदान करने के लिए 'आधार' जैसी डिजिटल सार्वजनिक व्यवस्था है। यह संघीय प्रणाली में केंद्र, राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से निर्मित है। इसमें तीन प्रमुख कृषि रजिस्ट्रियां/ डेटाबेस शामिल हैं (इन्फोग्राफिक देखें)।
  • कृषि निर्णय सहायता प्रणाली (DSS):
    • उपग्रह, मौसम, मिट्टी, फसलों और सरकारी योजनाओं के लिए भू-स्थानिक एवं गैर-भू-स्थानिक डेटा को एकीकृत करती है। 
    • राष्ट्रीय भू-स्थानिक नीति के अनुरूप फसल मानचित्रण, विविधीकरण और बीमा दावों का समर्थन करती है। 
  • राष्ट्रव्यापी मृदा संसाधन मानचित्रण परियोजना:
  • इसे भारतीय मृदा एवं भूमि उपयोग सर्वेक्षण (SLUSI) द्वारा शुरू किया गया है।   यह 1:10,000 पैमाने पर गांव स्तर की मिट्टी का मानचित्रण करने के लिए उपग्रहों से और भूमि आधारित सुविधाओं से प्राप्त उच्च-रिज़ॉल्यूशन डेटा का उपयोग करती है।
  • संधारणीय कृषि और बेहतर भूमि व फसल योजना के लिए विस्तृत मृदा प्रोफाइल एवं मानकीकृत मानचित्र बनाती है।
  • डिजिटल सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (Digital General Crop Estimation Survey: DGCES):
    • राज्य स्तरीय योजना से लेकर फसल कटाई प्रयोगों की फील्ड डेटा रिकॉर्डिंग और रिपोर्ट तैयार करने तक सामान्य फसल अनुमान सर्वेक्षण (GCES) प्रक्रिया को स्वचालित करना।
  • आईटी पहल समर्थन: मिशन के तहत राज्यों और अन्य संगठनों को आईटी पहल समर्थन तथा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की आईटी-संबंधित गतिविधियों के लिए समर्थन शामिल है।  
  • महालनोबिस राष्ट्रीय फसल पूर्वानुमान केंद्र (MNCFC) को सहायता:
    • फसल/FASAL (अंतरिक्ष, कृषि-मौसम विज्ञान और भूमि आधारित पर्यवेक्षणों का उपयोग करके कृषि उत्पादन का पूर्वानुमान लगाना) के अंतर्गत फसल रकबा (Acreage)  एवं उत्पादन का अनुमान लगाना तथा बागवानी फसलों का मूल्यांकन करना।
    • राज्यों के लिए सूखे की निगरानी, ​​मौसम ट्रैकिंग और भू-स्थानिक प्रशिक्षण में सहायता करना।
    • प्रधान मंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY)  के लिए तकनीकी भागीदार तथा क्षेत्र विश्लेषण, स्मार्ट सैंपलिंग और उपज विवाद समाधान में सहायता करना।