राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन - Ministry of Agriculture & Farmers Welfare | Current Affairs | Vision IAS

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राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन

अद्यतन: 27 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Agriculture & Farmers Welfare
लाभार्थी: Farmers

अवलोकन

उद्देश्य: वैज्ञानिक रूप से मान्य तरीकों से खेती को बढ़ावा देना, ताकि संधारणीयता, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित किया जा सके।

स्मरणीय तथ्य

  • उद्देश्य: वैज्ञानिक रूप से मान्य तरीकों से खेती को बढ़ावा देना, ताकि संधारणीयता, जलवायु परिवर्तन के अनुकूल कृषि और सुरक्षित भोजन सुनिश्चित किया जा सके। 
  • प्रकार: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। 
  • कवरेज: प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के पहचाने गए जिलों से 15,000 क्लस्टर चुने गए हैं। इससे 7.5 लाख हेक्टेयर कृषि क्षेत्र में प्राकृतिक कृषि शुरू की जाएगी।
  • ज्ञान भागीदार: राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान (MANAGE)।

अन्य उद्देश्य

  • प्रकृति आधारित संधारणीय कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देना और प्राकृतिक खेती में उपयोग होने वाले जैव-आदानों (इनपुट) का उपयोग बढ़ाना;
  • पशुधन (प्राथमिक रूप से स्थानीय नस्ल की गाय) के साथ-साथ कृषि-पशुपालन मॉडल को लोकप्रिय बनाना;
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs) आदि संस्थानों की कृषि-पारिस्थितिकी पर आधारित अनुसंधान और ज्ञान-आधारित विस्तार क्षमताओं को सशक्त बनाना।
  • प्राकृतिक रूप से उगाए गए रसायन मुक्त उत्पादों के लिए एक एकल राष्ट्रीय ब्रांड बनाना और उसे बढ़ावा देना।

प्रमुख विशेषताएं 

  • कार्यान्वयन संबंधी दृष्टिकोण:
    • किसान-से-किसान मॉडल: किसानों के नेतृत्व में प्राकृतिक कृषि को अपनाना।
    • कृषि-अवसंरचना: इसमें जैव-आदान संसाधन केंद्र (BRCs),  बीज बैंक, छोटे कृषि उपकरण और स्थानीय बाजार शामिल हैं।
    • बाजार प्रणाली: मूल्य संवर्धन के लिए किसानों हेतु बाजार और खाद्य प्रसंस्करण। 
  • प्रशिक्षण और अनुसंधान:
  • प्रशिक्षण इकोसिस्टम: बीजामृत, जीवामृत और नीमास्त्र जैसी प्राकृतिक कृषि पद्धतियों पर KVKs, कृषि विश्वविद्यालयों एवं स्थानीय प्राकृतिक कृषि संस्थानों द्वारा ऑन-फील्ड प्रशिक्षण।
  • अनुसंधान सहायता: ICAR, KVKs और विश्वविद्यालय प्राकृतिक कृषि के तरीकों का दस्तावेज़ीकरण एवं अध्ययन करेंगे।
  • शैक्षिक पाठ्यक्रम: प्राकृतिक कृषि पर समर्पित प्रमाण-पत्र, डिप्लोमा, स्नातक और स्नातकोत्तर कोर्सेस।
  • सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से विस्तार:
    • 30,000 कृषि सखियां {सामुदायिक संसाधन व्यक्ति (CRPs)}: प्राकृतिक कृषि अपनाने को बढ़ावा देने के लिए स्वयं-सहायता समूह (SHGs),  किसान उत्पादक संगठन (FPOs) और प्राथमिक कृषि ऋण समिति (PACS) जैसे महिलाओं के नेतृत्व वाले समुदाय आधारित संगठन (CBOs)।
    • प्राकृतिक कृषि क्लस्टर: प्रत्येक क्लस्टर 125 इच्छुक किसानों के साथ गठित होता है, और वे फिर सभी किसान 6 और किसानों को प्रशिक्षित करते हैं। इससे प्रत्येक क्लस्टर में लगभग 750 किसान हो जाते हैं।
    • सहभागी प्रमाणन: यह प्राकृतिक कृषि अपनाने वाले किसानों के लिए सहभागी गारंटी प्रणाली (PGS) के समान है।
  • बायो-इनपुट रिसोर्स सेंटर्स (BRCs): प्राकृतिक कृषि इनपुट्स की आपूर्ति के लिए 10,000 BRCs ग्राम पंचायत स्तर पर किसानों, FPO, SHG, KVK और गोशालाओं द्वारा संचालित किए जाते हैं।
  • उत्पादन आधारित प्रोत्साहन: प्रति वर्ष प्रति एकड़ 4000 रुपये (प्रति किसान को अधिकतम 1 एकड़ के लिए प्रोत्साहन) प्रशिक्षित इच्छुक किसानों के आधार प्रमाणित बैंक खातों में किश्तों में जारी किए जाएंगे। ये प्रोत्साहन 2 वर्षों के लिए प्रदान किए जाएंगे। 
  • सस्थाओं के मध्य समन्वय: बड़े पैमाने पर प्राकृतिक कृषि अपनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM),  राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (SRLM), FPOs, PACS, सरकारी संस्थाओं, CSR और अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।