कला संस्कृति विकास योजना
अद्यतन: 26 Nov 2025अवलोकन
यह देश में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक अम्ब्रेला योजना है।
- यह देश में कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए एक अम्ब्रेला योजना है।
घटक
- कला एवं संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए वित्तीय सहायता योजना
- रिपर्टरी अनुदान: प्रदर्शन कला की सभी शैलियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना। इसके अलावा गुरु-शिष्य परम्परा के अनुरूप नियमित आधार पर कलाकारों को उनके संबंधित गुरुओं द्वारा प्रशिक्षण प्रदान करना।
- कलाकारों की आयु के आधार पर प्रत्येक गुरु/ शिक्षक को 15,000/- रुपये प्रतिमाह और प्रत्येक शिष्य/ कलाकार को 2,000 से 10,000/- रुपये प्रतिमाह की दर से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- ऐसे सांस्कृतिक संगठन जिनकी राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति है उन्हें 5 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
- सांस्कृतिक समारोह एवं प्रोडक्शन अनुदान (CFPG): सेमिनार, सम्मेलन, अनुसंधान, नाटक-रंगमंच, संगीत आदि के लिए गैर-सरकारी संगठनों/ समितियों/ ट्रस्टों/ विश्वविद्यालयों आदि को वित्तीय सहायता प्रदान करना।
- सहायता राशि: 5 लाख रुपये तक
- हालांकि, असाधारण परिस्थितियों में 20 लाख रुपये तक की सहायता राशि प्रदान की जाएगी।
- सहायता राशि: 5 लाख रुपये तक
- हिमालय की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए वित्तीय सहायता: किसी संगठन के लिए वित्त-पोषण की मात्रा प्रति वर्ष 10 लाख रुपये है, जिसे असाधारण मामलों में 30 लाख रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
- बौद्ध/ तिब्बती संगठन के संरक्षण एवं विकास के लिए वित्तीय सहायता: योजना घटक के अंतर्गत वित्त-पोषण की मात्रा किसी संगठन के लिए प्रति वर्ष 30 लाख रुपये है। इसे असाधारण मामलों में 1 करोड़ रुपये तक बढ़ाया जा सकता है।
- रिपर्टरी अनुदान: प्रदर्शन कला की सभी शैलियों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करना। इसके अलावा गुरु-शिष्य परम्परा के अनुरूप नियमित आधार पर कलाकारों को उनके संबंधित गुरुओं द्वारा प्रशिक्षण प्रदान करना।
- सांस्कृतिक अवसंरचना के निर्माण के लिए वित्तीय सहायता योजना: इसके निम्नलिखित 3 घटक हैं:
- स्टूडियो थिएटर सहित भवन निर्माण संबंधी अनुदान के लिए वित्तीय सहायता।
- संबद्ध सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए वित्तीय सहायता।
- टैगोर सांस्कृतिक परिसरों के लिए वित्तीय सहायता।
- कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए छात्रवृत्ति और फैलोशिप योजना: इसमें निम्नलिखित तीन घटक शामिल हैं:
- संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय व्यक्तियों को फेलोशिप प्रदान करने की योजना।
- विभिन्न सांस्कृतिक क्षेत्रों में युवा कलाकारों को छात्रवृत्ति प्रदान करने के लिए योजना।
- सांस्कृतिक अनुसंधान के लिए टैगोर नेशनल फेलोशिप प्रदान करने के लिए योजना।
- कलाकार पेंशन योजना: इसका उद्देश्य वृद्ध कलाकारों और विद्वानों को 4,000 रुपये प्रति माह पेंशन प्रदान करना है। शर्त यह है कि वृद्ध कलाकारों और विद्वानों की आयु 60 वर्ष से कम न हो और वार्षिक आय 48,000 रुपये प्रति वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने कला, साहित्य आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो, लेकिन अब वे निर्धन स्थिति में जीवन यापन कर रहे हैं।
- सेवा भोज योजना: लोगों को मुफ्त भोजन वितरित करने के लिए धर्मार्थ/ धार्मिक संस्थानों द्वारा विशिष्ट कच्चे खाद्य पदार्थों की खरीद पर भुगतान किए गए केंद्रीय वस्तु और सेवा कर (CGST) तथा एकीकृत वस्तु और सेवा कर (IGST) में केंद्र सरकार के हिस्से की भरपाई भारत सरकार द्वारा वित्तीय सहायता के रूप में की जाएगी।
- अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा के लिए योजना: यह अनेक संस्थानों, समूहों, गैर-सरकारी संगठनों आदि को पुनर्जीवित और सशक्त बनाने के लिए शुरू की गई है ताकि वे भारत की समृद्ध अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर को सुदृढ़, संरक्षित, सुरक्षित और प्रचारित करने के लिए गतिविधियों/परियोजनाओं में संलग्न हो सकें।