डिजिटल इंडिया कार्यक्रम
अद्यतन: 25 Nov 2025अवलोकन
भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करना।
स्मरणीय तथ्य
- उद्देश्य: भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में रूपांतरित करना।
- प्रकृति: यह एक छत्रक कार्यक्रम है जो मंत्रालयों और विभागों की विभिन्न ई-गवर्नेंस संबंधी पहलों को एक साथ जोड़ता है।
- सार्वजनिक निजी भागीदारी (PPP): ई-गवर्नेंस परियोजनाओं के कार्यान्वयन हेतु जहां भी संभव हो, PPP को प्राथमिकता दी जाती है।
- कार्यान्वयन: इसे MeiTY के समग्र समन्वय के साथ सरकार द्वारा कार्यान्वित किया जाता है।
अन्य उद्देश्य:
- भारत को डिजिटल रूप से एक सशक्त समाज तथा ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करना।
- डिजिटल पहुंच, डिजिटल समावेशन तथा डिजिटल सशक्तीकरण सुनिश्चित करना और डिजिटल विभाजन को समाप्त करना।
- यह सुनिश्चित करना कि नागरिकों को सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप में उपलब्ध हों।
प्रमुख विशेषताएं
- पृष्ठभूमि : इसे नागरिकों को अलग-अलग सरकारी सेवाएं डिजिटल रूप में उपलब्ध करवाने के लिए 2015 में आरंभ किया गया था।
- यह एक अम्ब्रेला कार्यक्रम है जिसके अंतर्गत अलग-अलग केंद्रीय मंत्रालयों/ विभागों तथा राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों (UTs) की कई परियोजनाएं सम्मिलित हैं।
- डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न मिशन मोड एवं अन्य परियोजनाओं के कार्यान्वयन की जिम्मेदारी समग्र रूप से संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/ विभागों एवं राज्य सरकारों की है।

- यह विजन तीन प्रमुख क्षेत्रों पर केंद्रित है:
- प्रत्येक नागरिक के लिए मुख्य उपयोगिता के रूप में डिजिटल अवसंरचना
- एक कोर उपयोगिता के रूप में हाई-स्पीड इंटरनेट उपलब्ध कराना,
- जीवन से मृत्यु तक डिजिटल पहचान - विशिष्ट, आजीवन, ऑनलाइन, प्रामाणिक
- डिजिटल और वित्तीय क्षेत्रक में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मोबाइल फोन और बैंक खाता,
- कॉमन सर्विस सेंटर तक आसान पहुंच,
- पब्लिक क्लाउड पर साझा करने योग्य निजी जगह,
- देश में सुरक्षित और विश्वसनीय साइबर-स्पेस
- मांग पर शासन और सेवाएं
- विभागों या अधिकार क्षेत्रों में निर्बाध रूप से एकीकृत सेवाएं
- ऑनलाइन एवं मोबाइल प्लेटफॉर्म के जरिए रियल-टाइम में सेवाएं उपलब्ध कराना
- प्रत्येक नागरिक के लिए मुख्य उपयोगिता के रूप में डिजिटल अवसंरचना

- सभी नागरिक अधिकार क्लाउड पर उपलब्ध होंगे
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में सुधार के लिए सेवाओं को डिजिटल रूप से रूपांतरित करना
- वित्तीय लेन-देन को डिजिटल एवं कैशलेस बनाना
- निर्णय समर्थन प्रणाली और विकास के लिए भू-स्थानिक सूचना प्रणाली (GIS) का लाभ उठाना
- नागरिकों का डिजिटल सशक्तीकरण
- सार्वभौमिक डिजिटल साक्षरता
- सार्वभौमिक रूप से सुलभ डिजिटल संसाधन
- सभी दस्तावेज/ प्रमाण-पत्र क्लाउड पर उपलब्ध होंगे
- भारतीय भाषाओं में सभी डिजिटल संसाधनों/ सेवाओं की उपलब्धता
- सहभागी शासन के लिए सहयोगात्मक डिजिटल प्लेटफॉर्म
- क्लाउड के माध्यम से सभी पात्रताओं की सुवाह्यता (पोर्टेबिलिटी)
- डिजिटल इंडिया (DI) पहलों को सक्षम करने वाली प्रमुख एजेंसियां: इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
- प्रमाणन प्राधिकरण नियंत्रक (CCA)
- प्रगत संगणन विकास केंद्र (सी-डैक/C-DAC)
- रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र (CRIS)
- सामान्य सेवा केंद्र (CSC)
- लघु किसान कृषि-व्यवसाय संघ (SFAC)
- कुछ प्रमुख पहलें: आधार, कॉमन सर्विस सेंटर (CSCs), डिजी लॉकर, डिजी सेवक, भारत ब्रॉडबैंड नेटवर्क लिमिटेड, CERT-In, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के लिए उत्कृष्टता केंद्र, साइबर स्वच्छता केंद्र आदि।