सिक्योर हिमालय (उच्च श्रेणी के हिमालयी पारितंत्र की आजीविका, संरक्षण, संधारणीय इस्तेमाल और पुनरुद्धार सुनिश्चित करने संबंधी) - Ministry of Environment, Forest And Climate Change | Current Affairs | Vision IAS
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सिक्योर हिमालय (उच्च श्रेणी के हिमालयी पारितंत्र की आजीविका, संरक्षण, संधारणीय इस्तेमाल और पुनरुद्धार सुनिश्चित करने संबंधी)

अद्यतन: 25 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Environment, Forest And Climate Change
लाभार्थी: Miscellaneous

अवलोकन

विस्तृत उच्च हिमालयी पारितंत्र में स्थानीय एवं वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण जैव विविधता, भूमि और वन संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना।

स्मरणीय तथ्य

  • उद्देश्य: उच्च श्रेणी के हिमालयी पारितंत्र की आजीविका, संरक्षण, संधारणीय इस्तेमाल और पुनरुद्धार सुनिश्चित करना  
  • अंतर्राष्ट्रीय समर्थन: वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP)
  • अवधि: 2017-2024
  • पार्टनर एजेंसी: ट्रैफिक (TRAFFIC) 

अन्य उद्देश्य 

विस्तृत उच्च हिमालयी पारितंत्र में स्थानीय एवं वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण जैव विविधता, भूमि और वन संसाधनों का संरक्षण सुनिश्चित करना। 

प्रमुख विशेषताएं

  • वैश्विक परियोजनायह "संधारणीय विकास के लिए वन्यजीव संरक्षण और अपराध की रोकथाम पर एक वैश्विक साझेदारी" (वैश्विक वन्यजीव कार्यक्रम) का हिस्सा है। यह वैश्विक पर्यावरण सुविधा (GEF) द्वारा वित्त-पोषित है।
    • यह वैश्विक हिम तेंदुआ और पारिस्थितिकी तंत्र संरक्षण (Global Snow Leopard Ecosystem Protection Program: GSLEP) में योगदान करता है। GSLEP 12 देशों की सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों, नागरिक समाज और निजी क्षेत्रकों की एक संयुक्त पहल है।
  • संधारणीय संरक्षण: यह विस्तृत उच्च हिमालयी पारितंत्र में अल्पाइन चरागाहों और जंगलों के संधारणीय प्रबंधन को बढ़ावा देता है।
    • यह एंडेंजर्ड हिम तेंदुओं और उनके पर्यावासों सहित वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण वन्यजीवों का संरक्षण सुनिश्चित करता है।
  • आच्छादित क्षेत्र
    • ट्रांस और ग्रेटर हिमालयी क्षेत्रों में ऊंचाई वाले परिदृश्य, जिनमें शामिल हैं:
      • चांगथांग (जम्मू और कश्मीर)
      • लाहुल-पांगी और किन्नौर (हिमाचल प्रदेश)
      • पिथौरागढ़ (उत्तराखंड) में गंगोत्री-गोविंद और दारमा-व्यास घाटी
      • कंचनजंगा-ऊपरी तीस्ता घाटी (सिक्किम) 
  • त्रि-आयामी रणनीति (Three pronged strategy): यह योजना निम्नलिखित रणनीतियों का अनुसरण करती है:
    • वैकल्पिक और आजीविका के नए विकल्प प्रदान करना 
    • वर्तमान आजीविका में वृद्धि करना 
    • कौशल आधारित रोजगार के अवसरों का समर्थन करना