राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM)
अद्यतन: 27 Nov 2025अवलोकन
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) एक केन्द्र प्रायोजित योजना है जिसका उद्देश्य सभी को समान, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करना है, जिसमें मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना, बीमारियों को नियंत्रित करना, आयुष को बढ़ावा देना और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है।
स्मरणीय तथ्य
- उद्देश्य: समान, वहनीय और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तक सार्वभौमिक पहुंच प्रदान करना।
- मंत्रालय: केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय।
- मिशन प्रमुख: मिशन का निदेशक अतिरिक्त सचिव के स्तर का होगा।
- अवधि: 2021-2026
अन्य उद्देश्य:
- शिशु एवं मातृ मृत्यु दर में कमी लाना।
- संचारी एवं गैर संचारी रोगों की रोकथाम एवं उन्हें नियंत्रित करना।
- एकीकृत व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल तक पहुंच सुनिश्चित करना।
- जनसंख्या स्थिरीकरण तथा लैंगिक और जनसांख्यिकीय संतुलन स्थापित करना।
- स्थानीय स्वास्थ्य देखभाल पद्धतियों को पुनर्जीवित करना और आयुष को मुख्यधारा में लाना।
- भोजन एवं पोषण, स्वच्छता और साफ-सफाई के लिए सार्वजनिक सेवाओं तथा लोक स्वास्थ्य देखभाल तक सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना।
- स्वास्थ्यप्रद जीवन शैली को बढ़ावा देना।
प्रमुख विशेषताएं
- पृष्ठभूमि: 2013 में, NRHM (2005 में शुरू) और NUHM (2013 में शुरू) को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के अंतर्गत विलय कर दिया गया।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की 2 उप-योजनाएं इस प्रकार हैं: राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM) और राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM)
- राष्ट्रीय शहरी स्वास्थ्य मिशन (NUHM)
- कवरेज: सभी राज्यों की राजधानियाँ, जिला मुख्यालय और 50,000 से अधिक आबादी वाले शहर/ कस्बें।
- विकेन्द्रीकरण: आवश्यकता आधारित शहर विशिष्ट शहरी स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली और समुदाय एवं स्थानीय निकायों तथा गैर सरकारी संगठनों के साथ साझेदारी में कार्यान्वित।
- बाहरी सहयोगी: एशियाई विकास बैंक (ADB) द्वारा कुछ संकेतकों से संबंधित प्रगति के आधार पर धन उपलब्ध कराया जा रहा है।
- सेवा वितरण अवसंरचना: शहरी-प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, शहरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (U-CHC) और रेफरल अस्पताल और आउटरीच सेवाएं।
- राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन
- मिशन का जोर सभी स्तरों पर अंतर-क्षेत्रीय अभिसरण के साथ पूरी तरह कार्यात्मक, समुदाय के स्वामित्व वाली, विकेंद्रीकृत स्वास्थ्य वितरण प्रणाली स्थापित करने पर है।
- यह जल, स्वच्छता, शिक्षा, पोषण, सामाजिक और लैंगिक समानता जैसे स्वास्थ्य के निर्धारकों की एक विस्तृत श्रृंखला पर एक साथ कार्रवाई सुनिश्चित करेगा।
- राज्यों को प्रोत्साहन: राज्यों का वित्त-पोषण राज्य की कार्यक्रम कार्यान्वयन योजना (PIP) पर आधारित है।
- ऐसे राज्य जो IMR, MMR, टीकाकरण, गुणवत्ता प्रमाणित स्वास्थ्य सुविधाओं की संख्या और अनुपात जैसे प्रमुख परिणामों/ आउटपुट के संबंध में बेहतर प्रगति को दर्शाते हैं वे प्रोत्साहन के रूप में अतिरिक्त धनराशि प्राप्त कर सकते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक वैक्सीन इंटेलिजेंस नेटवर्क (Electronic Vaccine Intelligence Network: e-VIN): यह देश भर में कई स्थानों पर रखे गए टीकों के स्टॉक और भंडारण के तापमान की वास्तविक समय की निगरानी को सक्षम करने के लिए अत्याधुनिक तकनीक, एक मजबूत आईटी अवसंरचना और प्रशिक्षित मानव संसाधन को एक साथ लाता है।
NHM के तहत प्रमुख पहलें
- जननी सुरक्षा योजना (Janani Suraksha Yojana)
यह स्वास्थ्य केंद्रों में प्रसव को बढ़ावा देने के लिए एक मांग संवर्धन और सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है। - यह 100% केंद्र प्रायोजित योजना है।
- जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (JSSK)
- उद्देश्य: गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान करना तथा संस्थागत प्रसव में होने वाले अधिक खर्च की समस्या का समाधान करना।
- यह कार्यक्रम उन गर्भवती महिलाओं को 'बिना खर्च वाले प्रसव' की सुविधा प्रदान करता है जो अपने प्रसव के लिए सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का उपयोग करती हैं (इन्फोग्राफिक्स देखें)

- राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (Rashtriya Bal Swasthya Karyakram: RBSK)
- उद्देश्य: 4'D' - बच्चों में जन्म के समय किसी प्रकार के विकार (Defects at birth), बीमारी (Diseases), न्यूनता (Deficiencies) और विकलांगता सहित बच्चों के विकास में आने वाली रुकावट (Development Delays) की शुरुआती तौर पर पहचान करना तथा इस दिशा में शुरुआती हस्तक्षेप करना।
- अपेक्षित लाभार्थी: ग्रामीण क्षेत्रों और शहरी झुग्गी बस्तियों में रहने वाले 0-6 वर्ष तक आयु समूह के सभी बच्चों को इसमें शामिल किया गया है। 18 वर्ष तक के बड़े बच्चे, जो सरकारी विद्यालयों और सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 12 तक के छात्र/ छात्रा हैं।
- बाल स्वास्थ्य स्क्रीनिंग और प्रारंभिक हस्तक्षेप सेवाओं में 30 चयनित स्वास्थ्य स्थितियों को कवर करने की परिकल्पना की गई है। इसके तहत स्क्रीनिंग, यथाशीघ्र निदान और निःशुल्क प्रबंधन परिकल्पित है।
- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम (Rashtriya Kishor Swasthya Karyakram: RKSK)
- लाभार्थी: यह कार्यक्रम 10-19 वर्ष के आयु-वर्ग के किशोरों को सूचित निर्णय लेने में सक्षम बनाता है।
- बीमारियों, विशेष रूप से गैर-संक्रामक रोगों (NCDs), का शुरुआती दौर में पता लगाने के लिए विद्यालयों में छात्रों के स्वास्थ्य की जांच की जाती है।
- समुदाय-आधारित हस्तक्षेप: इसके तहत सहकर्मी शिक्षक (साथिया) योजना संबंधी जानकारी किशोरों को उपलब्ध कराएंगे।
- साथिया रिसोर्स किट: सहकर्मी शिक्षक को सहयोग प्रदान करने हेतु, विशेष रूप से गांवों में संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करना।
- मासिक धर्म स्वच्छता योजना (MHS): ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली किशोरियों को सब्सिडी प्राप्त सैनिटरी नैपकिन प्रदान किये जाते हैं।
- राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य रणनीति: इसे MOHFW और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) ने विकसित किया है।
- RMNCH+A (प्रजनन, मातृ, नवजात, बाल और किशोर स्वास्थ्य): इसका उद्देश्यभारत में बच्चों की उत्तरजीविता में सुधार लाने के लिए उनके पूरे जीवन-काल को योजना के दायरे मेंलाना है।

- सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (Universal Immunization Programme: UIP)
- यह कार्यक्रम केंद्र सरकार द्वारा 100% वित्त-पोषित है।
- इस कार्यक्रम को 1985 में आरंभ किया गया था। यह विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों में से एक है।
- सघन मिशन इंद्रधनुष (Intensified Mission Indradhanush: IMI)
- पृष्ठभूमि: 2014 में, भारत सरकार नेनियमित टीकाकरण कवरेजमें सुधार करने के उद्देश्य से एक प्रमुख (फ्लैगशिप) कार्यक्रम मिशन इंद्रधनुष (MI) शुरू किया था।
- इसके बाद IMI शुरू की गई जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि टीकाकरण से कोई वंचित नहीं रह जाए।
- संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (Communicable Disease Control Programme)
- राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP): यह कार्यक्रम मलेरिया, जापानी एन्सेफलाइटिस, डेंगू, चिकनगुनिया, काला-अजार और लिम्फैटिक फाइलेरियासिस जैसे वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम और नियंत्रण के लिए शुरू किया गया है।

- राष्ट्रीय क्षय रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP): इसका उद्देश्यसतत विकास लक्ष्यों से पांच साल पहले यानी 2025 तक भारत में टीबी के मामलों को कम करना है।
- निक्षय पोषण योजना (NPY): DBT के माध्यम से टीबी रोगियों के लिए 1000 रुपये प्रतिमाह की सहायता।
- राष्ट्रीय कुष्ठ रोग उन्मूलन कार्यक्रम (NLEP): इसके तहत आबादी के सभी वर्गों को गुणवत्तापूर्ण कुष्ठ रोग सेवाएं निःशुल्क प्रदान की जा रही है।
- एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (Integrated Diseases Surveillance Program: IDSP): इसका मुख्य उद्देश्य महामारी-प्रवण रोगों (एपिडेमिक प्रोन डिज़ीज़) के लिए विकेंद्रीकृत, प्रयोगशाला आधारित सूचना प्रौद्योगिकी सक्षम रोग निगरानी तंत्र को सशक्त बनाना/बनाये रखना है।
- गैर-संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम (Non Communicable Disease Control Programmes)
- कैंसर, मधुमेह, हृदय रोग और स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPCDCS)
- राष्ट्रीय दृष्टिहीनता एवं दृष्टिबाधिता नियंत्रण कार्यक्रम (NPCBVI)
- राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP)
- बुजुर्गों की स्वास्थ्य देखभाल के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPHCE)
- राष्ट्रीय प्रशामक (Palliative) देखभाल कार्यक्रम (NPPC)
- राष्ट्रीय बधिरता रोकथाम एवं नियंत्रण कार्यक्रम (NPPCD)
- राष्ट्रीय तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम (NTCP)
- जलने से जख्मी होने की घटनाओं की रोकथाम के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPPMBI)
- राष्ट्रीय ओरल हेल्थ कार्यक्रम (NOHP)