ऑटोमोबाइल व ऑटो कंपोनेंट्स के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना - Ministry of Heavy Industries | Current Affairs | Vision IAS

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ऑटोमोबाइल व ऑटो कंपोनेंट्स के लिए उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन योजना

अद्यतन: 27 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Heavy Industries
लाभार्थी: Miscellaneous

अवलोकन

भारत 2026 तक वॉल्यूम के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोटिव बाजार बन सकता है।

स्मरणीय तथ्य

  • लक्ष्य: वैश्विक ऑटोमोटिव व्यापार में भारत की हिस्सेदारी में वृद्धि करना।
  • योजना का प्रकार: यह केंद्रीय क्षेत्रक की एक योजना है।
  • कवरेज: इसके तहत मौजूदा और नई निर्माण कंपनियों, दोनों को कवर किया जाएगा।
  • अवधि: 2021 से वित्तीय वर्ष 2027-28 तक।

अन्य उद्देश्य: उन्नत ऑटोमोटिव उत्पाद प्रौद्योगिकी (AAT) उत्पादों के क्षेत्रों में लागत संबंधी बाधाओं को समाप्त करना, किफायती उत्पाद बनाना और एक मजबूत आपूर्ति श्रृंखला का निर्माण करना।

प्रमुख विशेषताएं 

  • पृष्ठभूमि: भारत 2026 तक वॉल्यूम के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोटिव बाजार बन सकता है।
  • प्रोत्साहन:
    • एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (AAT) की स्वदेशी आपूर्ति श्रृंखला में नए निवेश के लिए 18% तक का प्रोत्साहन।
    • प्रति संपूर्ण समूह कंपनी/ कंपनियों के लिए कुल प्रोत्साहन राशि 6,485 करोड़ रुपये होगी।
    • इसके तहत FAME-II योजना में अपनाए गए चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम का पालन किया जाता है।
    • प्रोत्साहन हेतु योग्य बिक्री की गणना के लिए आधार वर्ष: 2019-20. 
    • प्रोत्साहन 2023-24 से शुरू होकर लगातार पांच वित्तीय वर्षों  यानी वित्तीय वर्ष 2027-28  तक के लिए उपलब्ध है। पहले यह प्रोत्साहन वित्तीय वर्ष 2026-27 तक उपलब्ध था।
  • प्रोत्साहन के लिए शर्तें:

  • इस योजना के तहत 2 घटकों को शामिल किया गया है:-

  • पात्रता: मौजूदा और नई दोनों प्रकार की विनिर्माण कंपनियां; जो राजस्व (ऑटोमोटिव और/या ऑटो कंपोनेंट विनिर्माण से) और निवेश (अचल संपत्तियों में कंपनी या उसके समूह कंपनियों का वैश्विक निवेश) मानदंडों को पूरा करती हैं।

  • FAME-II के तहत पात्रता का प्रभाव: इस योजना के तहत इलेक्ट्रिक वाहन (EV) निर्माताओं को देय प्रोत्साहन, इलेक्ट्रिक (और हाइब्रिड) वाहनों के तीव्र अंगीकरण एवं विनिर्माण-2 (FAME/फेम-II योजना) के तहत दिए गए प्रोत्साहनों के अतिरिक्त/से स्वतंत्र होगा।
  • परियोजना प्रबंधन एजेंसी (PMA):  भारतीय औद्योगिक वित्त निगम लिमिटेड (IFCI)  परियोजना प्रबंधन एजेंसी है। IFCI सार्वजनिक क्षेत्रक की एक गैर-बैंकिंग वित्त कंपनी है।