स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 (SBM-शहरी 2.0) - Ministry of Housing And Urban Affairs | Current Affairs | Vision IAS

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स्वच्छ भारत मिशन शहरी 2.0 (SBM-शहरी 2.0)

अद्यतन: 27 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Housing And Urban Affairs
लाभार्थी: Urban Households

अवलोकन

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 का लक्ष्य 100% अपशिष्ट प्रसंस्करण, सतत स्वच्छता, प्रयुक्त जल प्रबंधन, नागरिक भागीदारी और स्वच्छ, स्वस्थ शहरी स्थानों के लिए डिजिटल नवाचार के माध्यम से 2026 तक कचरा मुक्त शहर बनाना है।

स्मरणीय तथ्य

  • योजना का उद्देश्य : इसका उद्देश्य 'कचरा मुक्त शहर (GFCs) का निर्माण करना है। 
  • योजना का प्रकार: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है।
  • योजना के तहत कवरेज: योजना के तहत सभी वैधानिक नगर शामिल किए गए हैं। 
  • योजना की अवधि: वर्ष 2026 तक

अन्य उद्देश्य

  • इस योजना के निम्नलिखित उद्देश्य हैं;
    • सार्वजनिक स्थानों पर स्वच्छता (क्लीननेस) और साफ-सफाई (हाइजीन) सुनिश्चित करना;
    • वायु प्रदूषण को कम करना, 
    • समग्र स्वच्छता (सैनिटेशन) सुनिश्चित करना, 
    • उपयोग किए गए पानी को प्रवाहित करने से पहले उसका उपचार करना
    • क्षमता निर्माण करना, 
    • जागरूकता का प्रसार करना तथा 
    • जन आंदोलन चलाना।

मुख्य विशेषताएं

  • पृष्ठभूमि: SBM-U योजना को 2 अक्टूबर 2014 को शुरू किया गया था। इसका लक्ष्य है भारत को खुले में शौच से मुक्त या Open Defecation Free (ODF) बनाना। यह योजना पांच वर्ष (2014-2019) के लिए शुरू की गई थी।
  • वित्त पोषण के लिए शर्त: सरकार अब ULBs द्वारा न्यूनतम 1-स्टार रेटिंग प्रमाणन प्राप्त करने पर ही धनराशि जारी करती है।
  • वित्त पोषण हेतु मिशन के घटक:
    • सतत ठोस अपशिष्ट प्रबंधन: कचरा मुक्त शहरों के लिए 100% वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रसंस्करण।
    • सतत स्वच्छता: सभी वैधानिक कस्बों में ODF स्थिति को बनाए रखना।
    • प्रयुक्त जल प्रबंधन: अनुपचारित मल गाद और प्रयुक्त जल के स्त्राव को रोकना; 1 लाख से कम आबादी वाले शहरों में सुरक्षित उपचार एवं पुन: उपयोग सुनिश्चित करना आदि।
    • जागरूकता और व्यवहार परिवर्तन: IEC/BCC (सूचना, शिक्षा व संचार/ व्यवहार-जन्य परिवर्तन संचार) के माध्यम से "कचरा मुक्त" शहरों को बढ़ावा देना। 
    • क्षमता निर्माण: प्रभावी कार्यान्वयन के लिए संस्थानों को मजबूत करना।
  • उद्यमशीलता को बढ़ावा देना: निजी उद्यमियों द्वारा स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में स्थानीय रूप से नवप्रवर्तित, लागत प्रभावी समाधान और व्यवसाय मॉडल को अपनाना।
  • प्रौद्योगिकी और डिजिटल सक्षमता:
    • संस्थागत और व्यक्तिगत क्षमताओं के निर्माण के लिए ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म्स को मजबूत करना,
    • स्वच्छता और अपशिष्ट प्रबंधन में कौशल विकास को बढ़ावा देना,
    • सूचना और संचार-प्रौद्योगिकी (ICT)  सक्षम गवर्नेंस प्रदान करना।
  • शहरी-ग्रामीण समन्वय: साझा अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधाओं की स्थापना करके निकटवर्ती शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों की जरूरतों को दक्षता-पूर्वक पूरा करने के लिए अवसंरचनाओं के क्लस्टर का विकास करना।
  • चैलेंज फंड: 10 लाख और उससे अधिक की आबादी वाले शहरों को स्वच्छता और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए सेवा स्तरीय बेंचमार्क को पूरा करने के लिए 5 वर्षों में 13,029 करोड़ रुपये का चैलेंज फंड प्रदान किया जाएगा।

प्रमुख पहलें 

  • स्वच्छ सर्वेक्षण: यह अपनी तरह का दुनिया का सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) इसका कार्यान्वयन भागीदार है।
  • मेरी LiFE, मेरा स्वच्छ शहर' अभियान का उद्देश्य मिशन LiFE के बारे में जागरूकता फैलाने और अपशिष्ट उत्पादन को कम करने के लिए नागरिकों के व्यवहार में बदलाव लाना है।
  • GFC के लिए राष्ट्रीय व्यवहार परिवर्तन संचार फ्रेमवर्क: इसका लक्ष्य GFC के लिए चल रहे जन आंदोलन को मजबूत करना है।