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नमामि गंगे कार्यक्रम

अद्यतन: 27 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Jal Shakti
लाभार्थी: Miscellaneous

अवलोकन

नमामि गंगे कार्यक्रम एक केन्द्रीय क्षेत्र की योजना है जिसे विश्व बैंक की सहायता से राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) द्वारा क्रियान्वित किया गया है, जिसका उद्देश्य प्रदूषण निवारण, पारिस्थितिकी पुनरुद्धार और सतत सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से गंगा नदी का पुनरुद्धार और संरक्षण करना है।

स्मरणीय तथ्य

  • योजना का उद्देश्य: गंगा नदी का कायाकल्प अर्थात् "अविरल धारा" (सतत प्रवाह), "निर्मल धारा" (प्रदूषण रहित प्रवाह), भूगर्भिक और पर्यावरणीय अखंडता सुनिश्चित करना।
  • योजना का प्रकार: यह केंद्रीय क्षेत्रक की एक योजना है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG)
  • बाह्य सहायता: विश्व बैंक परियोजनाओं का वित्त-पोषण कर रहा है। इसके लिए उसने 2026 तक पांच वर्षों की अवधि हेतु ऋण अनुमोदित किया है।

अन्य उद्देश्य

  • व्यापक योजना और प्रबंधन के लिए अंतर-क्षेत्रीय समन्वय को बढ़ावा देने हेतु नदी बेसिन दृष्टिकोण अपनाकर गंगा नदी के प्रदूषण में प्रभावी कमी और कायाकल्प सुनिश्चित करना।
  • पानी की गुणवत्ता एवं पर्यावरण की दृष्टि से संधारणीय विकास सुनिश्चित करने के लिए गंगा नदी में न्यूनतम पारिस्थितिकीय प्रवाह बनाए रखना।

प्रमुख विशेषताएं 

पृष्ठभूमि: यह 2014 में केंद्र सरकार द्वारा स्वीकृत एक एकीकृत संरक्षण मिशन है जिसका बजट ₹20,000 करोड़ है। इसके दो उद्देश्य हैं - प्रदूषण निवारण और राष्ट्रीय नदी गंगा का संरक्षण और पुनरुद्धार।

प्रमुख स्तंभ: इन्फोग्राफ़िक देखें।

  • प्रमुख रणनीति: 
    • व्यापक एकीकृत कार्यक्रम 
    • गैर-व्यपगत कोष
    • हाइब्रिड एन्युटी आधारित सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल को अपनाना
    • 5 वर्षीय समर्पित बजट आवंटन 
    • 15 वर्षों के लिए संचालन और रखरखाव (O&M)  की लागत शामिल 
  • गंगा नदी का कायाकल्प 
    • जन गंगा: जन जागरूकता को बढ़ाने के लिए लोगों को नदी से जोड़ना। साथ ही, बड़े पैमाने पर भागीदारी तथा समुदाय और आम जनता की सहभागिता को बढ़ावा देना।
    • निर्मल गंगा
    • अविरल गंगा
    • ज्ञान गंगा
  • राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG):  यह सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत 2011 में एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत हुआ था।
    • यह राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA)  की कार्यान्वयन शाखा के रूप में कार्य करता है। 
    • NGRBA का गठन पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम (EPA), 1986 के प्रावधानों के तहत किया गया है।
  • गंगा नदी घाटी प्रबंधन एवं अध्ययन केंद्र (cGanga): यह,राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) के साथ व्यापक थिंक टैंक कैपेसिटी के रूप में कार्य करता है।
    • इसे 2016 में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर (IITK) में स्थापित किया गया था।
    • यह गंगा नदी बेसिन के संधारणीय विकास हेतु डेटा संग्रह तथा ज्ञान एवं सूचना के सृजन और प्रसार के लिए कार्य करता है।
  • cGanga के उद्देश्य के भाग के रूप में, हर साल भारत जल प्रभाव शिखर सम्मेलन (India Water Impact summit) आयोजित किया जाता है।
  • संधारणीय और ईको-कृषि 
    • घाटी क्षेत्र में संधारणीय कृषि भू-खंडों का विकास करना और जल उपयोग दक्षता में सुधार करना।
    • गंगा ग्रामों में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना।
    • कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के साथ भागीदारी में शुरू किया गया है।
  • गंगा प्रहरी
    • ये ऐसे स्व-प्रेरित व्यक्ति हैं जो आगे गंगा संरक्षण के प्रयासों में दूसरों को भी लामबंद करेंगे। 
  • उन्हें गंगा नदी और उसकी जैव विविधता की पारिस्थितिक निगरानी, वृक्षारोपण तकनीक, जागरूकता आदि के लिए प्रशिक्षित किया जाता है।
  • रिवर फ्रंट का विकास: गंगा नदी के तट पर घाटों और शवदाह गृहों का निर्माण करना।
  • स्वच्छ गंगा कोष (Clean Ganga Fund: CGF): गैर-व्यपगत फंड
    • कानूनी स्थिति: यह भारतीय न्यास अधिनियम के तहत पंजीकृत है। केंद्रीय वित्त मंत्री इसकी अध्यक्षता करते हैं।
    • CSR का हिस्सा: इसमें योगदान भारतीय कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत एक अधिसूचित कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) गतिविधि के तहत किया जाता है।
    • सहयोग देने के लिए प्रोत्साहन: विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) से छूट प्राप्त है। आयकर की धारा 80G के तहत 100% कर कटौती के लिए पात्र है।
  • मानचित्रण संबंधी पहलें  
    • भौगोलिक मानचित्रण
  • भारतीय सर्वेक्षण विभाग LiDAR (लाइट डिटेक्शन एंड रेंजिंग) और GIS तकनीक का उपयोग करके गंगा कायाकल्प कार्य को सुगम बनाता है।
  • इसका उद्देश्य 5 प्रमुख राज्यों को कवर करते हुए लगभग 45,000 वर्ग कि.मी. क्षेत्र का मानचित्रण करना है। ये 5 प्रमुख राज्य हैं: उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल।
  • सांस्कृतिक मानचित्रण: INTACH के साथ भागीदारी में गंगा नदी के किनारे मूर्त, अमूर्त और निर्मित विरासत का डॉक्यूमेंटेशन करना।
  • सूक्ष्मजीव मानचित्रण: पारितंत्र सेवाओं के लिए संपूर्ण गंगा में सूक्ष्मजीव विविधता का GIS-आधारित मानचित्रण करना।
  • शहरी नदी प्रबंधन योजना (URMP): 
    • इसे शहरी मामलों के राष्ट्रीय संस्थान (NIUA) और NMCG द्वारा विकसित किया गया है।
    • इसका उद्देश्य गंगा नदी बेसिन में शहरी नदियों की संपूर्णता को बनाए रखना है।
  • अर्थ गंगा
  • लक्ष्य: संधारणीय विकास को बढ़ावा देकर गंगा संरक्षण के लिए लोगों की भागीदारी को बढ़ाना।
  • नदी के साथ लोगों को जोड़ने के लिए अर्थशास्त्र का उपयोग करना।
  • यह गंगा बेसिन से सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 3% का योगदान सुनिश्चित करेगा।
  • गंगा ग्राम योजना
    • उद्देश्य: गंगा नदी की मुख्यधारा के तट पर स्थित ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धार्मिक और/ या पर्यटक महत्त्व के गांवों को विकसित करना।
  • गंगा ग्राम से संबंधित कार्यों में व्यापक ग्रामीण स्वच्छता, जल निकायों और नदी घाटों का विकास करना, शवदाह गृह का निर्माण/ आधुनिकीकरण करना आदि शामिल हैं।
  • कंटीन्यूअस लर्निंग एंड एक्टिविटी पोर्टल (CLAP)
  • यह एक इंटरैक्टिव पोर्टल है जो भारत में नदियों के संबंध में संवाद और कार्रवाई शुरू करने की दिशा में कार्य कर रहा है।
  • विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषित और समर्थित है।
  • प्रयाग प्लेटफार्म (Platform for Real-time Analysis of Yamuna, Ganga: PRAYAG) 
    • प्रयाग यमुना, गंगा और उनकी सहायक नदियों के रियल-टाइम विश्लेषण के लिए प्लेटफार्म है।
    • प्रयाग विभिन्न ऑनलाइन डैशबोर्ड, जैसे- गंगा तरंग पोर्टल, गंगा डिस्ट्रिक्ट्स परफॉर्मेंस मॉनिटरिंग सिस्टम आदि के माध्यम से परियोजनाओं की कार्यान्वयन से जुड़ी हुई विभिन्न योजनाओं एवं निगरानी तथा ​​नदी जल की गुणवत्ता आदि के लिए एक रियल-टाइम निगरानी केंद्र है।
    • इसे नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत लॉन्च किया गया है।