स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II - Ministry of Jal Shakti | Current Affairs | Vision IAS

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स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) चरण-II

अद्यतन: 27 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Jal Shakti
लाभार्थी: Rural Households

अवलोकन

SBM (G) चरण-1 के तहत सभी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों ने 2 अक्टूबर, 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर स्वयं को ODF घोषित किया था।

स्मरणीय तथ्य 

  • योजना का प्रकार: यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है। 
  • योजना का उद्देश्य: सभी गांवों द्वारा जल्द-से-जल्द खुले में शौच मुक्त प्लस (ODF+) का दर्जा हासिल करना। 
  • मुख्य फोकस: बेहतर स्वच्छता और साफ-सफाई पद्धतियों को अपनाने के लिए लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना।
  • योजना की अवधि: 2020-21 से 2024-25 तक।

अन्य उद्देश्य 

  • गांवों में ठोस और तरल अपशिष्ट का सुरक्षित प्रबंधन सुनिश्चित करना, 
  • खुले में शौच मुक्त व्यवहार को बढ़ावा देना, और 
  • यह सुनिश्चित करना कि कोई भी पीछे न छूटे और हर कोई शौचालय का उपयोग करे।

प्रमुख विशेषताएं

  • पृष्ठभूमि: SBM (G) चरण-1 के तहत सभी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों ने 2 अक्टूबर, 2019 को महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर स्वयं को ODF घोषित किया था।
    • SBM  चरण II का लक्ष्य व्यापक स्वच्छता को सुनिश्चित करना है।
  • खुले में शौच से मुक्त (ODF)
    • SBM ODF: यदि कोई भी व्यक्ति खुले में शौच करता नहीं पाया जाता है, तो उस स्थान को ODF घोषित किया जाता है।
    • SBM ODF+: ODF दर्जे को यथावत बनाए रखने के साथ-साथ यह सुनिश्चित करना कि सभी सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालय कार्यशील व सुव्यवस्थित हों।
  • SBM ODF++: ODF+ दर्जे को यथावत बनाए रखना तथा शौचालयों की गाद और सेप्टेज का प्रबंधन करना।
  • SBM (G)-II के घटक:
    • व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों (IHHLs) का निर्माण: IHHL के निर्माण के लिए और जल भंडारण सुविधाओं हेतु 12,000 रुपये दिए जाते हैं। 
    • शौचालयों की मरम्मत: राज्यों और जिलों को यह निर्देश जारी किया गया है कि वे लोगों को अपने-अपने घरेलू शौचालयों की समय-समय पर व जरूरत के अनुसार मरम्मत करने के लिए प्रोत्साहित करें। इसके लिए राज्यों व जिलों को IEC एवं अंतर्वैयक्तिक संचार (IPC) उपायों को अपनाना चाहिए। 
    • सामुदायिक स्वच्छता परिसरों (CSCs) का निर्माण: ग्राम स्तर पर CSCs के निर्माण के लिए ग्राम पंचायतों को वित्तीय सहायता दी जाती है।
    • ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए परिसंपत्तियों का निर्माण (SWM):
      • जैव-निम्नीकरणीय अपशिष्ट प्रबंधन
  • कम्पोस्टिंग
    • घरों में जहां जगह उपलब्ध हो, वहां पर कम्पोस्टिंग के लिए गड्ढे का निर्माण करना, तथा  
    • 100-150 घरों के लिए सामुदायिक स्तर पर कम्पोस्टिंग हेतु गड्ढों का निर्माण करना। 
  • गोबर-धन: गांव/ ब्लॉक/ जिला स्तर पर सामुदायिक या क्लस्टर-स्तर के बायोगैस संयंत्रों की स्थापना के लिए प्रत्येक जिले को 50 लाख रुपये प्रदान किए जाते हैं।
  • प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधक: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन ब्लॉक या जिला योजना का एक घटक होना चाहिए।
  • तरल अपशिष्ट प्रबंधन के लिए कार्य:
    • ऑन-साइट ग्रे वाटर प्रबंधन: सोक पिट, लीच पिट, मैजिक पिट या किचन गार्डन जैसी संधारणीय तकनीकों का उपयोग करके स्रोत पर ग्रे-वाटर का प्रबंधन करना।
    • सामुदायिक स्तर पर ग्रे-वाटर प्रबंधन: यदि ऑन-साइट प्रबंधन अव्यावहारिक है,यह विकल्प चुना जा सकता है।
  • मल गाद प्रबंधन (FSM):  जिलों को ऑन-साइट स्वच्छता प्रणालियों की मशीनीकृत मल गाद निकासी को बढ़ाना चाहिए। साथ ही, मलीय पदार्थ के सुरक्षित निपटान के लिए ट्रीटमेंट यूनिट्स स्थापित करनी चाहिए।
    • जिला या ब्लॉक स्तर पर FSM को लागू करने के लिए प्रति व्यक्ति 230 रुपये आवंटित किए जाते हैं।
    • जरूरत पड़ने पर अलग-अलग स्रोतों से अतिरिक्त वित्त-पोषण प्राप्त किया जा सकता है। इन स्रोतों में 15वें वित्त आयोग की सिफारिशें, संसद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MPLAD)/ विधान परिषद सदस्य स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (MLALAD)/ कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) फंड और अन्य राज्य/ केंद्र सरकार की योजनाओं में निर्धारित वित्त-पोषण स्रोत शामिल हैं।
  • पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) की भूमिका: योजना बनाना; फंड की प्राप्ति; समन्वय; निगरानी (सामाजिक लेखा-परीक्षा के माध्यम से); सामुदायिक लामबंदी के जरिए कार्यान्वयन आदि।
  • ग्राम जल और स्वच्छता समिति (VWSC): यह समिति ग्राम पंचायत की उप-समिति के रूप में गठित की जा सकती है। यह ग्रामीणों को स्वच्छता हेतु प्रेरित करने, ग्राम कार्य योजना निर्मित करने आदि मामलों में समर्थन प्रदान करेगी। 
  • निगरानी: राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र ने निम्नलिखित का विकास किया है-
    • ठोस तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) डैशबोर्ड;
    • ODF+ ऐप;
    • स्वच्छ ग्राम दर्पण ऐप आदि।

स्वच्छता को बढ़ावा देने के लिए आरंभ की गई मुख्य पहलें 

  • स्वच्छ प्रतिष्ठित स्थल (Swachh Iconic Places: SIP) पहल:
    • उद्देश्य: SIP स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के अंतर्गत शुरू की गई एक पहल है। इसका उद्देश्य प्रतिष्ठित स्थलों (आध्यात्मिक व सांस्कृतिक) पर और उसके आस-पास साफ-सफाई एवं स्वच्छता मानकों में सुधार करके आगंतुकों के अनुभव को सुखद बनाना है।
    • अन्य प्रमुख हितधारक: शहरी विकास मंत्रालय, संस्कृति मंत्रालय, पर्यटन मंत्रालय तथा संबंधित राज्य सरकारें 
  • राष्ट्रीय स्वच्छता केंद्र (Rashtriya Swachhta Kendra: RSK): यह गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति (राजघाट) में स्थित है। यह SBM पर एक इंटरैक्टिव अनुभव केंद्र है।
  • दरवाजा बंद मीडिया अभियान: इसका लक्ष्य यह उन लोगों में व्यवहार परिवर्तन को बढ़ावा देने से संबंधित है, जिनके घरों में शौचालय हैं लेकिन वे उनका उपयोग नहीं करते हैं। इस अभियान को विश्व बैंक की सहायता प्राप्त है।
    • 'दरवाजा बंद-भाग 2' अभियान देश के सभी गांवों के ODF के दर्जे को बनाए रखने पर केंद्रित है।
  • स्वच्छता ही सेवा अभियान: यह स्वच्छता पहल, स्वच्छ भारत मिशन को रेखांकित करने के लिए एक पखवाड़े (fortnight-long/ 14 दिन) तक चलने वाला स्वच्छता अभियान है।