प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन (PM-SYM) - Ministry of Labour & Employment | Current Affairs | Vision IAS

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प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन (PM-SYM)

अद्यतन: 28 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Labour & Employment
लाभार्थी: Senior Citizens

अवलोकन

प्रधानमंत्री श्रम योगी मान धन (पीएम-एसवाईएम) एक केंद्रीय क्षेत्र की योजना है जो असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को स्वैच्छिक और अंशदायी पेंशन कवरेज प्रदान करती है, तथा वृद्धावस्था सामाजिक सुरक्षा के लिए 60 वर्ष की आयु के बाद 3000 रुपये की न्यूनतम मासिक पेंशन सुनिश्चित करती है।

स्मरणीय तथ्य 

  • योजना का उद्देश्य: असंगठित क्षेत्रक के श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।
  • योजना का प्रकार: यह केंद्रीय क्षेत्रक की एक योजना है। 
  • योजना की प्रकृति: 50:50 के अनुपात में स्वैच्छिक और अंशदान आधारित पेंशन योजना के रूप में संचालित होती है।
  • कार्यान्वयन एजेंसी: इस योजना का पेंशन फंड मैनेजर LIC है और यह पेंशन भुगतान के लिए जिम्मेदार है।

अन्य उद्देश्य: असंगठित श्रमिकों को वृद्धावस्था में सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना।

प्रमुख विशेषताएं

  • स्वैच्छिक और अंशदान आधारित पेंशन: लाभार्थी को एक निर्दिष्ट आयु तक विशेष अंशदान का भुगतान करना होता है। केंद्र सरकार लाभार्थी के अंशदान के बराबर का योगदान करती है। 
  • न्यूनतम सुनिश्चित पेंशन: इसके तहत लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु के बाद प्रति माह न्यूनतम 3,000 रुपये की सुनिश्चित पेंशन प्राप्त होगी।
  • पारिवारिक पेंशन: पेंशन मिलने के दौरान लाभार्थी की मृत्यु होने पर लाभार्थी के जीवनसाथी को मूल पेंशन का 50% पारिवारिक पेंशन के रूप में प्राप्त करने का अधिकार होगा। पारिवारिक पेंशन केवल लाभार्थी के जीवनसाथी को ही मिलेगी।
  • अन्य योजनाओं के साथ अनुकूलता: पात्र व्यक्ति अटल पेंशन योजना (APY) के साथ-साथ PM-SYM में भी शामिल हो सकता है।
  • नामांकन एजेंसी: देश में सभी कॉमन सर्विस सेंटर्स (CSCs) इस योजना में नामांकन करने की सुविधा प्रदान कर रहे हैं।
  • अंशदानों का नियमित भुगतान: यदि कोई लाभार्थी लगातार अंशदान करने में विफल रहता है, तो उसके पास अपने भुगतान को नियमित करने का विकल्प होता है। इसमें लाभार्थी को सरकार द्वारा पेनल्टी के रूप में तय किए गए शुल्क के साथ संपूर्ण बकाया राशि का भुगतान करना होगा। 
  • नामांकन के लिए निर्धारित शर्तें: व्यक्ति के पास आधार कार्ड के साथ-साथ IFSC सहित बचत खाता/ जन धन खाता होना चाहिए।
  • योजना को छोड़ने संबंधी प्रावधान और रिफंड:
    • 10 वर्ष से कम: यदि लाभार्थी 10 वर्ष से कम की अवधि के भीतर इस योजना को छोड़ देता है, तो केवल लाभार्थी द्वारा किया गया अंशदान बचत खाते पर मिलने वाली ब्याज दर के साथ लौटा दिया जाएगा।
  • 10 साल के बाद लेकिन 60 साल से पहले: यदि लाभार्थी 10 वर्ष या उससे अधिक की अवधि के बाद लेकिन 60 वर्ष की उम्र तक पहुंचने से पहले योजना को छोड़ देता है, तो लाभार्थी को संचित ब्याज के साथ अपने अंशदान का हिस्सा प्राप्त होता है। यह संचित ब्याज या तो फंड द्वारा अर्जित ब्याज होगा या बचत बैंक ब्याज दर के आधार पर होगा। इनमें से जो भी अधिक होगा, उसका लाभार्थी को भुगतान कर दिया जाएगा। 
  • 60 वर्ष से पहले स्थायी दिव्यांगता: यदि लाभार्थी 60 वर्ष की आयु तक पहुंचने से पहले स्थायी रूप से दिव्यांग हो जाता है और योजना में शामिल नहीं रह सकता है, तो उसके/ उसकी जीवनसाथी के पास नियमित अंशदान का भुगतान करके योजना में बने रहने या योजना को छोड़ने का विकल्प होता है।
  • इस योजना के तहत अपात्र लाभार्थी: व्यक्ति को NPS, ESIC योजना या EPFO में नामांकित नहीं होना चाहिए और उसे करदाता भी नहीं होना चाहिए।