MSMEs के प्रदर्शन में सुधार और तेजी (RAMP) - Ministry of Micro, Small And Medium Enterprises | Current Affairs | Vision IAS

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MSMEs के प्रदर्शन में सुधार और तेजी (RAMP)

अद्यतन: 25 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Micro, Small And Medium Enterprises
लाभार्थी: Small Traders and MSMEs

अवलोकन

राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी उन्नयन, नवाचार, डिजिटलीकरण, बाजार पहुंच आदि को प्रोत्साहन देकर MSMEs के प्रदर्शन को बढ़ावा देना।

स्मरणीय तथ्य 

  • योजना का उद्देश्य: राज्य सरकारों की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से प्रौद्योगिकी उन्नयन, नवाचार, डिजिटलीकरण, बाजार पहुंच आदि को प्रोत्साहन देकर MSMEs के प्रदर्शन को बढ़ावा देना।
  • योजना का प्रकार: यह एक केंद्रीय क्षेत्रक की योजना है।
  • योजना की अवधि: 2022-23 से 2026-27 तक।  
  • वित्त-पोषण: विश्व बैंक से 500 मिलियन अमेरिकी डॉलर ऋण लिया जाएगा और शेष 308 मिलियन अमेरिकी डॉलर का वित्त-पोषण भारत सरकार द्वारा किया जाएगा।

अन्य उद्देश्य

  • MSME संवर्धन और विकास में केंद्र-राज्य सहयोग में तेजी लाना।
  • प्रौद्योगिकी उन्नयन के लिए MoMSME की पहले से मौजूद योजनाओं की प्रभावशीलता को बढ़ाना। 
  • MSMEs के लिए प्राप्य वित्त-पोषण बाजार को मजबूत बनाना।
  • सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी ट्रस्ट (CGTMSE) की प्रभावशीलता को बढ़ाना। साथ ही, MSEs तथा महिला स्वामित्व वाले MSEs की हरित पहलों के लिए गारंटी को बढ़ावा देना।
  • MSEs को भुगतान में होने वाले विलंब की घटनाओं को कम करना।

मुख्य विशेषताएं

  • पृष्ठभूमि: RAMP को केंद्र ने तैयार और प्रस्तावित किया था। इसे यू.के.सिन्हा समिति, के.वी.कामथ समिति और प्रधान मंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PMEAC) द्वारा की गई सिफारिशों के अनुरूप MSMEs को मजबूत करने के लिए प्रस्तुत किया गया था।  
    • RAMP को प्रोग्राम-फॉर-रिजल्ट्स (P for R) प्रोग्राम के रूप में शुरू किया गया है।
  • RAMP  कार्यक्रम के तत्वावधान में निम्नलिखित तीन उप-योजनाएं शुरू की गई हैं:
    • MSME हरित निवेश और परिवर्तन के लिए वित्त-पोषण योजना (MSE GIFT Scheme): इसका उद्देश्य MSMEs को ब्याज में छूट देना और ऋण गारंटी समर्थन के जरिए हरित प्रौद्योगिकी को अपनाने में मदद करना है।  
    • चक्रीय अर्थव्यवस्था में संवर्धन और निवेश के लिए MSE योजना (MSE SPICE Scheme): इसके तहत ऋण सब्सिडी के जरिए चक्रीय अर्थव्यवस्था से जुड़ी परियोजनाओं का समर्थन किया जाएगा। इसके अलावा, यह योजना MSME क्षेत्रक के 2070 तक शून्य उत्सर्जन के सपने को साकार करने में मदद करेगी। 
    • विलंबित भुगतान के लिए ऑनलाइन विवाद समाधान पर MSE योजना (MSE ODR Scheme): इसके तहत MSMEs के लिए विलंबित भुगतान जैसे मुद्दे के समाधान हेतु आधुनिक आई.टी. उपकरणों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ कानूनी समर्थन को समन्वित किया जाएगा।
  • कार्यान्वयन रणनीति
    • MSME कार्यक्रम में सलंग्न संस्थानों और गवर्नेंस को मजबूत बनाना।
    • बाजार पहुंच, फर्म की क्षमताओं और वित्त तक पहुंच का समर्थन करना।
  • रणनीतिक निवेश योजनाओं (SIPs) में:- इसे राज्यों/ केंद्रशासित प्रदेशों के सहयोग से तैयार किया गया।
    • RAMP के तहत MSMEs की पहचान और एकजुटता के लिए एक आउटरीच योजना को शामिल किया जाएगा;
  • प्रमुख बाधाओं और अंतरालों की पहचान की जाएगी;
  • योजना के तहत लक्ष्यों को निर्धारित किया जाएगा; तथा  
  • नवीकरणीय ऊर्जा, ग्रामीण व गैर-कृषि व्यवसाय, महिला उद्यमों आदि सहित प्राथमिकता वाले क्षेत्रकों में हस्तक्षेप के लिए आवश्यक बजट पेश किए जाएंगे। 
  • देश के 10 राज्यों के SIPs को मंजूरी प्रदान की गई है। ये राज्य हैं- तमिलनाडु, ओडिशा, सिक्किम, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, मिजोरम, आंध्र प्रदेश, बिहार और कर्नाटक।
  • निधि का प्रवाह: MoMSME के वर्तमान कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए संवितरण से जुड़े संकेतकों (DLIs) के विपरीत मंत्रालय के बजट में RAMP के माध्यम से निधि का प्रवाह होगा। साथ ही, बाजार तक पहुंच और प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा। 
  • RAMP  पर्यावरण और सामाजिक मूल्यांकन (ESSA):  विश्व बैंक द्वारा वित्त-पोषण की शर्तों के एक हिस्से के रूप में, मंत्रालय के विविध कार्यक्रमों के तहत शामिल लास्टमाइल उद्यमों द्वारा पर्यावरण और सामाजिक मानकों के अनुपालन को सत्यापित करने के लिए ESSA अनिवार्य है।
  • निगरानी और नीति का अवलोकन: 
    • RAMP की समग्र निगरानी और नीति का अवलोकन एक शीर्ष राष्ट्रीय MSME  परिषद द्वारा किया जाएगा। इसमें विविध मंत्रालयों के प्रतिनिधियों सहित MSME  मंत्री भी शामिल होंगे। MSME मंत्री परिषद का अध्यक्ष होगा। 
    • RAMP के तहत प्रदेय उत्पाद की निगरानी के लिए MSME मंत्रालय के ​​सचिव की अध्यक्षता में एक कार्यक्रम समिति होगी। 
    • इसके अलावा, दिन-प्रतिदिन के कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर और राज्यों में कार्यक्रम प्रबंधन इकाइयां (PMUs) होंगी। 
      • इन इकाइयों में MSME मंत्रालय और राज्यों के सहयोग से उद्योग से प्रतिस्पर्धात्मक रूप से चुने गए पेशेवर एवं विशेषज्ञ शामिल होंगे।