सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGMSE) - Ministry of Micro, Small And Medium Enterprises | Current Affairs | Vision IAS
मेनू
होम

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के लिए प्रासंगिक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय विकास पर समय-समय पर तैयार किए गए लेख और अपडेट।

त्वरित लिंक

High-quality MCQs and Mains Answer Writing to sharpen skills and reinforce learning every day.

महत्वपूर्ण यूपीएससी विषयों पर डीप डाइव, मास्टर क्लासेस आदि जैसी पहलों के तहत व्याख्यात्मक और विषयगत अवधारणा-निर्माण वीडियो देखें।

करंट अफेयर्स कार्यक्रम

यूपीएससी की तैयारी के लिए हमारे सभी प्रमुख, आधार और उन्नत पाठ्यक्रमों का एक व्यापक अवलोकन।

ESC

सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी योजना (CGMSE)

अद्यतन: 25 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Micro, Small And Medium Enterprises
लाभार्थी: Small Traders and MSMEs

अवलोकन

ऋण वितरण प्रणाली को मजबूत करना एवं MSE क्षेत्रक के लिए ऋण के प्रवाह को सुविधाजनक बनाना।

स्मरणीय तथ्य 

  • योजना का उद्देश्य: सूक्ष्म और लघु उद्यमों (Micro & Small Enterprises) के लिए संस्थागत ऋण की उपलब्धता बढ़ाना।
  • ऋण देने वाले संस्थान: वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, अनुसूचित/ गैर-अनुसूचित शहरी सहकारी बैंक, आदि।
  • पात्र उद्यम: मौजूदा और नए, दोनों उद्यम इस योजना के तहत पात्र हैं।
  • कार्यान्वयन प्राधिकरण: क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट।

अन्य उद्देश्य 

  • ऋण वितरण प्रणाली को मजबूत करना एवं MSE क्षेत्रक के लिए ऋण के प्रवाह को सुविधाजनक बनाना।
  • गिरवी (कोलैटरल)/ तीसरे पक्ष की गारंटी के बिना बैंक ऋण उपलब्ध कराना। 
  • सरकारी सहायता से वंचित या सरकारी सहायता का उचित लाभ न उठाने वालों को वित्त (ऋण) प्राप्त करने में सक्षम बनाना। बैंकों, MFIs आदि से नई पीढ़ी के उद्यमियों को वित्त प्राप्ति की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

प्रमुख विशेषताएं 

  • पृष्ठभूमि: इस योजना को औपचारिक रूप से 2000 में शुरू किया गया था।
  • पात्र गतिविधियां: इनमें विनिर्माण एवं सेवाएं सहित व्यापार (खुदरा/ थोक व्यापार) और शिक्षण/ प्रशिक्षण शामिल हैं। 
  • शामिल नहीं किया गया है: स्वयं सहायता समूह (SHG)  और कृषि क्षेत्रक इस योजना के लिए पात्र नहीं हैं।
  • पात्र ऋण सुविधा: इस योजना के तहत पात्र प्रत्येक उधार मांगने वाले को 500 लाख रुपये तक निधि और गैर-निधि आधारित (लेटर ऑफ क्रेडिट, बैंक गारंटी आदि) ऋण सुविधाएं प्रदान की जाती है।
  • वार्षिक गारंटी शुल्क (Annual Guarantee Fee: AGF): योजना के तहत पहले वर्ष के लिए गारंटीकृत राशि पर और शेष अवधि के लिए क्रेडिट सुविधा की बकाया राशि पर AGF शुल्क वसूल किया जाएगा।
    • हाल ही में, 1 करोड़ रुपये तक के ऋण के लिए गारंटी शुल्क में 50 प्रतिशत की कमी की गई है जिसके कारण न्यूनतम गारंटी शुल्क केवल 0.37% प्रति वर्ष के स्तर पर आ गया है।
  • खाता NPAs में बदले जाने पर दावा निपटान: इसके तहत जब खाते गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPAs) में बदल जाते हैं तो ऋण देने वाली संस्था क्रेडिट सुविधा के संबंध में गारंटी संबंधी प्रावधान को लागू कर सकती है।
    • हालांकि, गारंटी को लागू करने से पहले कानूनी कार्यवाही संबंधी पूर्व शर्त को अब 10 लाख रुपये (पहले 5 लाख रुपये) तक की ऋण सुविधाओं के लिए छूट दी गई है। 
  • गारंटी की अवधि: इस योजना के तहत गारंटी कवर सावधि ऋण/ मिश्रित ऋण की स्वीकृत अवधि तक के लिए है। कार्यशील पूंजी के मामले में, गारंटीकृत कवर 5 वर्ष या 5 वर्ष के ब्लॉक के लिए होता है।
  • CGTMSE:  केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय तथा सिडबी ने इस योजना के क्रियान्वयन के लिए सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट (CGTMSE) नामक एक ट्रस्ट की स्थापना की है।
    • CGTMSE की निधि में भारत सरकार और सिडबी द्वारा क्रमशः 4:1 के अनुपात में अंशदान दिया जा रहा है।