सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP) - Ministry of Micro, Small And Medium Enterprises | Current Affairs | Vision IAS
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सूक्ष्म और लघु उद्यम क्लस्टर विकास कार्यक्रम (MSE-CDP)

अद्यतन: 25 Nov 2025
मंत्रालय: Ministry of Micro, Small And Medium Enterprises
लाभार्थी: Small Traders and MSMEs

अवलोकन

MSEs की संधारणीयता, संवृद्धि और क्षमता निर्माण में सहायता करना।

स्मरणीय तथ्य

  • उद्देश्य: सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (MSEs) की प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादकता बढ़ाना 
  • लाभार्थी:  स्पेशल पर्पज व्हीकल (SPV) के रूप में मौजूदा उद्यमी।
  • वित्त-पोषण : सरकारी वित्त-पोषण केंद्र और राज्यों के बीच साझा किया जाता है।
  • कार्यक्रम की अवधि: MSE-CDP के नए दिशा-निर्देशों को 15वें वित्त आयोग की अवधि (2021-22 से 2025-26) के दौरान लागू किया जाएगा।

अन्य उद्देश्य:

  • MSEs की संधारणीयता, संवृद्धि और क्षमता निर्माण में सहायता  करना। 
  • औद्योगिक क्षेत्रों में परीक्षण, प्रशिक्षण केंद्र, कच्चा माल डिपो, बहिस्राव उपचार, पूरक उत्पादन प्रक्रियाओं को पूरा करने आदि के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर्स की स्थापना करना।

मुख्य विशेषताएं   

  • क्लस्टर की विशेषताएं 
    • ऐसे उद्यम जो भौगोलिक क्षेत्र से बाहर हो सकते हैं और समान/ समरूप  उत्पादों/ पूरक उत्पादों/ सेवाओं का उत्पादन कर सकते हैं जिन्हें साझा   भौतिक अवसंरचना सुविधाओं द्वारा एक साथ जोड़ा जा सकता है।
    • पहचान योग्य और निकटवर्ती क्षेत्र [काफी हद तक] या एक मूल्य श्रृंखला के भीतर अवस्थित उद्यमों का समूह
    • इनकी साझा चुनौतियों का समाधान करना होगा।
  • दो घटक
    • सामान्य सुविधा केंद्र (CFCs):  घटक में औद्योगिक संपदा में CFCs के रूप में भौतिक "परिसंपत्तियों" का निर्माण शामिल है। 
    • अवसंरचना विकास (ID):  यह घटक नए/मौजूदा अधिसूचित औद्योगिक संपदा में अवसंरचना के विकास के लिए है। 
  • सरकार द्वारा वित्तीय सहायता: परियोजना लागत के आधार पर, केंद्र द्वारा वित्त पोषण किया जाएगा
    • CFC के लिए परियोजना लागत का 60%  या 70%। 
    • ID के लिए परियोजना लागत का 50%  या 60%। 

  • सहायता की सीमा: अलग-अलग परियोजनाओं की  लागत के लिए कोई सीमा निर्धारित नहीं है, हालांकि केंद्र सरकार की सहायता केवल ऊपरी सीमा तक ही सीमित होगी।