केंद्र प्रायोजित और केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं का युक्तिकरण
केंद्रीय वित्त मंत्रालय (MoF) ने केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) और केंद्रीय क्षेत्र योजनाओं की समीक्षा शुरू की है ताकि अतिव्यापी योजनाओं का विलय किया जा सके और कार्यान्वयन दक्षता को बढ़ाया जा सके।
वर्तमान योजनाओं का अवलोकन
- वर्तमान में सरकार 54 केंद्र प्रायोजित योजनाएं (CSS) और लगभग 260 केंद्रीय क्षेत्र की योजनाएं संचालित कर रही है।
- योजनाओं की इतनी बड़ी संख्या का परिणामों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिससे समय-समय पर इनकी समीक्षा अनिवार्य हो जाती है।
आलोचना और वित्तीय निहितार्थ
- विकसित भारत - रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 के तहत ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्यक्रम राज्यों पर 40% व्यय का भार डालता है।
- केंद्र प्रायोजित योजनाएं (CSS) राज्यों की राजकोषीय स्वतंत्रता को कम करती हैं, जिससे उनकी पसंदीदा कार्यक्रमों पर खर्च करने की क्षमता प्रभावित होती है।
- भारतीय रिजर्व बैंक के दिसंबर 2024 के अध्ययन में यह बात सामने आई कि केंद्र सरकार की कई योजनाएं राज्य सरकारों के खर्च करने के लचीलेपन को कम करती हैं, जिससे सहकारी राजकोषीय संघवाद कमजोर होता है।
योजनाओं के युक्तिकरण की आवश्यकता
- केंद्र प्रायोजित योजनाओं (CSS) के युक्तिकरण से संघ और राज्य दोनों स्तरों पर ‘राजकोषीय स्थान’ और व्यय दक्षता में सुधार हो सकता है।
- राज्य विकास के विभिन्न स्तरों पर हैं और उनकी आवश्यकताएं भी अलग-अलग हैं, जिससे पता चलता है कि राज्य सरकारों को विकासात्मक और सामाजिक क्षेत्र की योजनाओं को तैयार और प्रबंधित करना चाहिए।
व्यापक नीतिगत विचार
- तीव्र आर्थिक संवृद्धि और विकास के लिए राजकोषीय संसाधनों के पुनर्आवंटन पर बहस की आवश्यकता है।
- राज्य सरकारें वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रही हैं, जिनमें उच्च ऋण स्तर और लोकलुभावन योजनाएं शामिल हैं, जो अस्थिर राजकोषीय स्थिति का कारण बनती हैं।
- इन चुनौतियों के बावजूद, राज्यों के सशक्तिकरण में कटौती नहीं की जानी चाहिए; इसके बजाय, कठोर राजकोषीय नियम और पारदर्शी लेखांकन आवश्यक हैं।