माधव गाडगिल: पारिस्थितिकी के अगुआ
प्रख्यात पारिस्थितिकीविद् माधव गाडगिल को पश्चिमी घाट की पारिस्थितिक समझ और संरक्षण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए जाना जाता है। इस क्षेत्र के पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित करने में उनके प्रयास निर्णायक रहे हैं।
पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल
- गाडगिल ने 'पश्चिमी घाट पारिस्थितिकी विशेषज्ञ पैनल' का नेतृत्व किया, जिसे सामान्यतः 'गाडगिल समिति' के नाम से जाना जाता है।
- इस समिति ने पश्चिमी घाट के संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र की रक्षा के लिए कई महत्वपूर्ण सिफारिशें करने में आधारभूत भूमिका निभाई।
सम्मान एवं पुरस्कार
- वर्ष 2024 में, गाडगिल को संयुक्त राष्ट्र द्वारा 'चैंपियंस ऑफ द अर्थ' (Champions of the Earth) पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
- यह संयुक्त राष्ट्र का सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान है, जो पश्चिमी घाट में उनके मौलिक और अभूतपूर्व कार्यों को मान्यता देता है।
शैक्षणिक योगदान
- उनका बेंगलुरु स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) से घनिष्ठ संबंध था।
- उन्होंने IISc में 'पारिस्थितिकी विज्ञान केंद्र' की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
इतिहास
- उन्होंने 'ए वॉक अप द हिल: लिविंग विद पीपल एंड नेचर' नामक पुस्तक लिखी है।
- यह संस्मरण भारत की पारिस्थितिक चुनौतियों और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
लेखों की एक श्रृंखला के माध्यम से, पारिस्थितिकी में गाडगिल के योगदान और पारिस्थितिक संरक्षण में उनकी अंतर्दृष्टि पर चर्चा की गई है, जो पर्यावरण संरक्षण और नीति पर उनके स्थायी प्रभाव को दर्शाती है।