उत्तरी कश्मीर के ज़ेहनपोरा में पुरातात्विक खोज
उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले के ज़ेहनपोरा गांव में हाल ही में हुई खोज में 10 एकड़ में फैले मानव निर्मित टीले मिले हैं, जिनकी आयु 2,000 वर्ष से अधिक होने का अनुमान है। पहले इन्हें प्राकृतिक संरचनाएं माना जाता था, लेकिन अब इन्हें सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण संरचनाओं के रूप में मान्यता प्राप्त है।
महत्व और ऐतिहासिक संदर्भ
- यह स्थल कुषाण काल का है, जो जम्मू और कश्मीर के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को उजागर करता है।
- कश्मीर के बारे में लिखे गए शुरुआती लेखों में इस स्थल का उल्लेख मिलता है, लेकिन हाल ही में पुरातात्विक ध्यान दिए जाने तक यह काफी हद तक अनछुआ ही रहा।
- माना जाता है कि ये संरचनाएं बौद्ध स्तूपों से मिलती-जुलती हैं, जिसका समर्थन फ्रांस के एक संग्रहालय से प्राप्त फोटोग्राफिक साक्ष्य भी करते हैं।
उत्खनन और अनुसंधान
कश्मीर विश्वविद्यालय और जम्मू-कश्मीर के अभिलेखागार, पुरातत्व और संग्रहालय विभाग की शोध टीमें ड्रोन और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों का उपयोग करके विस्तृत मानचित्रण कर रही हैं। इस शोध का उद्देश्य स्थल के संपूर्ण विस्तार और महत्व को उजागर करना है।
कश्मीर में बौद्ध धर्म का ऐतिहासिक प्रभाव
- कश्मीर में बौद्ध धर्म के आगमन का श्रेय मौर्य वंश के राजा अशोक को दिया जाता है, जबकि कल्हण की राजतरंगिणी से इसके और भी गहरे संबंध होने का संकेत मिलता है।
- कुषाण शासकों, विशेषकर कनिष्क ने बौद्ध धर्म को लोकप्रिय बनाने, मठों, विहारों और स्तूपों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- महायान बौद्ध धर्म, जो बाद में चीन और मध्य एशिया में फैला, की उत्पत्ति कश्मीर में मानी जाती है।
विरासत और संरक्षण
कश्मीर भर में फैले असंख्य पुरातात्विक स्थलों में बौद्ध विरासत के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं, जिनमें से प्रत्येक को इस समृद्ध ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए आगे अनुसंधान और संरक्षण की आवश्यकता है।