राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संसद को संबोधन
संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विकसित भारत, राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय एकता जैसे प्रमुख राष्ट्रीय मुद्दों पर सांसदों के बीच एकता पर जोर दिया, जो राजनीतिक मतभेदों से परे हैं। उनके भाषण में भारत की एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में निरंतर प्रगति को रेखांकित किया गया, जो कई सरकारों और पीढ़ियों की भागीदारी से संभव हुई है।
भाषण के मुख्य बिंदु
- अनेकता में एकता:
- उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सांसदों को राष्ट्रीय मुद्दों पर अपने मतभेदों के बावजूद एकजुट होना चाहिए।
- महात्मा गांधी, नेहरू, सरदार पटेल और अन्य जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के बीच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं पर बनी आम सहमति का उल्लेख किया गया।
- विकसित भारत 2047:
- उन्होंने 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया, जो स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगा।
- उन्होंने सामूहिक प्रयास और अनुशासन के महत्व पर जोर दिया।
- राष्ट्रीय उपलब्धियां:
- लाखों लोगों को प्रभावित करने वाली कल्याणकारी योजनाओं पर प्रकाश डाला गया, जैसे कि आवास, जल आपूर्ति और एलपीजी कनेक्शन।
- 750 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और रक्षा क्षेत्र में हुई प्रगति जैसे आर्थिक विकास संकेतकों पर ध्यान दिया गया।
- राष्ट्रीय सुरक्षा:
- उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय रक्षा बलों के प्रदर्शन की सराहना की।
- माओवादी प्रभावित जिलों की संख्या 126 से घटकर तीन हो गई है।
भविष्य की संभावनाएं
राष्ट्रपति मुर्मू ने संवैधानिक मूल्यों और राष्ट्रीय हितों को बनाए रखने के लिए संसद, सरकार और नागरिकों के बीच सहयोग पर विश्वास व्यक्त किया। उन्होंने भारत के विकास को आगे बढ़ाने के लिए नवाचार, सुशासन और निरंतर सुधारों के महत्व पर बल दिया।
निष्कर्ष
यह संबोधन व्यापक था, जिसमें भारत की विकास संबंधी उपलब्धियों का प्रतिबिंब था और भविष्य की प्रगति के लिए एक स्पष्ट मार्ग प्रशस्त किया गया था। इसमें राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एकता, अनुशासन और सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर बल दिया गया।