बांग्लादेश की राजनीति का अवलोकन
बांग्लादेश में हाल के राजनीतिक घटनाक्रमों में तारिक रहमान के नेतृत्व वाली मध्य-दक्षिणपंथी बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले प्रतिद्वंद्वियों को हराकर चुनाव जीत लिया। अगस्त 2024 में प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाए जाने के बाद यह पहला चुनाव था।
चुनाव परिणाम और राजनीतिक बदलाव
- BNP को 300 सदस्यीय संसद में दो-तिहाई बहुमत हासिल होने की प्रबल संभावना दिख रही थी।
- जमात-ए-इस्लामी ने 1991 में अपनी सीटों की संख्या 18 से बढ़ाकर 60 से अधिक कर दी।
भारत की प्रतिक्रिया और भविष्य के संबंध
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान को "निर्णायक जीत" के लिए बधाई दी, जो नई सरकार के साथ वार्ता करने के लिए भारत की तत्परता का संकेत है।
- भारत के BNP के साथ ऐतिहासिक संबंध जनरल जियाउर रहमान, तारिक रहमान के पिता के समय से हैं।
पृष्ठभूमि और ऐतिहासिक संदर्भ
भारत और बांग्लादेश के बीच संबंध जटिल रहे हैं, जो अतीत की राजनीतिक गतिशीलता और सुरक्षा चिंताओं से प्रभावित हैं। खालिदा जिया के कार्यकाल के दौरान, विद्रोही समूहों को समर्थन देने के कारण भारत विरोधी भावनाएं बढ़ीं।
2008 के बाद के घटनाक्रम
- शेख हसीना की सरकार ने आतंकी समूहों पर नकेल कसते हुए भारत-बांग्लादेश के आतंकवाद विरोधी सहयोग को मजबूत किया।
- हसीना द्वारा जमात और BNP के खिलाफ की गई कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित थी, जिससे द्विपक्षीय संबंधों पर असर पड़ा।
BNP की राजनीतिक रणनीति
निर्वासन से लौटने के बाद तारिक रहमान ने भारत के प्रति सुलह का रुख अपनाया है।
- BNP के घोषणा-पत्र में "बांग्लादेश सर्वोपरि" पर जोर दिया गया है, जो अप्रत्यक्ष रूप से भारत का संदर्भ देता है और आंतरिक मामलों में गैर-हस्तक्षेप की वकालत करता है।
- जमात के घोषणा-पत्र में भारत सहित पड़ोसी देशों के साथ शांतिपूर्ण संबंधों का आह्वान किया गया है।
भारत के लिए चुनौतियाँ और अवसर
- प्रत्यर्पण मुद्दा: शेख हसीना के भारत में रहने का प्रबंधन और भड़काऊ बयानों को रोकना।
- आर्थिक संबंध: बांग्लादेश दक्षिण एशिया में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, विशेष रूप से वस्त्र और ऊर्जा क्षेत्र में।
- सुरक्षा संबंधी चिंताएं: BNP के पूर्व कार्यकाल की स्थितियों में कोई गिरावट न हो, यह सुनिश्चित करना और जमात के साथ खुले संचार चैनल बनाए रखना।
- विकास परियोजनाएं: भारतीय राज्यों को बांग्लादेश से जोड़ने वाली संपर्क परियोजनाओं को जारी रखना।
- जन-जन संबंध: बेहतर वीजा व्यवस्था के माध्यम से भारत में बांग्लादेशी चिकित्सा उपचार और पर्यटन को सुगम बनाना।
- प्रवासन संबंधी मुद्दे: भारत में इसकी राजनीतिक संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए आर्थिक प्रवासन का सौहार्दपूर्ण प्रबंधन।
- धार्मिक सद्भाव: बांग्लादेश के भीतर चरमपंथी और अल्पसंख्यक विरोधी तत्वों पर अंकुश लगाना।
- भू-राजनीतिक रणनीति: द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करके बांग्लादेश को पाकिस्तान या चीन की ओर झुकने से रोकना।
निष्कर्ष
बांग्लादेश में हाल ही में हुए राजनीतिक बदलाव भारत के लिए चुनौतियां और अवसर दोनों प्रस्तुत करते हैं। इन परिस्थितियों का प्रभावी प्रबंधन शेख हसीना के कार्यकाल के दौरान द्विपक्षीय संबंधों के स्वर्णिम युग को पुनः स्थापित कर सकता है।