रायसीना संवाद का अवलोकन
भारत के भू-राजनीति और भू-अर्थशास्त्र पर आयोजित प्रमुख सम्मेलन, रायसीना संवाद का 11वां संस्करण नई दिल्ली में हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।
भू-राजनीतिक चिंताएँ: ईरानी जहाज का डूबना
- हिंद महासागर में अमेरिका द्वारा एक ईरानी जहाज को डुबोए जाने की घटना ने श्रीलंका और मालदीव जैसे छोटे क्षेत्रीय देशों के बीच चिंताएं बढ़ा दी हैं।
- ईरान का युद्धपोत आईरिस देना भारत के साथ बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास से लौट रहा था। यह हमला श्रीलंका के पास हुआ, जिसने क्षेत्रीय तनाव को उजागर किया।
- भारत, एक "प्रमुख सुरक्षा प्रदाता" के रूप में, इन सुरक्षा चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की उम्मीद है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएँ
- मालदीव के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद ने सुरक्षा प्रदाता के रूप में भारत की भूमिका पर जोर दिया।
- श्रीलंका ने हमले में करीब 30 ईरानी नाविकों को बचाया, जबकि हमले में 80 लोगों के हताहत होने की खबर है।
- श्रीलंका जैसे छोटे देशों पर बाहरी झटकों के आर्थिक प्रभावों को लेकर चिंता व्यक्त की गई।
भारत की रणनीतिक पहलें
- भारत ने अपनी सागर नीति को महासागर नीति में विस्तारित किया है, जो सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक उन्नति पर केंद्रित है।
- इन पहलों में सूचना संलयन केंद्र - हिंद महासागर क्षेत्र, कोलंबो सुरक्षा पहल और हिंद महासागर रिम एसोसिएशन में नेतृत्व शामिल हैं।
- भारत ने अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा और मिलान अभ्यास सहित नौसैनिक कार्यक्रमों की मेजबानी की, जिसमें 75 देशों ने भाग लिया।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ और प्रभाव
- पूर्व विदेश सचिव कंवल सिबल ने अमेरिकी हमले की आलोचना करते हुए इसे पूर्व नियोजित हमला बताया।
- इस हमले ने रायसीना वार्ता पर ग्रहण लगा दिया, जिससे हवाई क्षेत्र प्रतिबंधों के कारण अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति प्रभावित हुई।
रायसीना संवाद विषय
इस वर्ष के रायसीना संवाद का विषय "संस्कार - अभिकथन, सामंजस्य, उन्नति" था। इस कार्यक्रम का आयोजन विदेश मंत्रालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन द्वारा किया गया था।