पश्चिम एशिया संकट पर लोकसभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का भाषण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 मार्च, 2026 को लोकसभा को संबोधित करते हुए पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और भारत पर इसके प्रभावों के बारे में बात की।
प्रमुख चिंताएँ और सरकार की प्रतिक्रिया
- पश्चिम एशिया की स्थिति: इसे "बेहद चिंताजनक" बताया गया है और इसके दीर्घकालिक प्रभाव होने की आशंका है।
- एकता का आह्वान: मोदी ने संसद से इस मुद्दे पर "एकजुट और सर्वसम्मत आवाज" प्रस्तुत करने का आग्रह किया।
- कूटनीतिक प्रयास:
- पश्चिम एशिया के राष्ट्राध्यक्षों से संपर्क किया और भारतीयों की सुरक्षा के आश्वासन प्राप्त किए।
- भारत संवाद और कूटनीति के माध्यम से शांति को बढ़ावा देता है और नागरिकों और बुनियादी ढांचे पर हमलों का विरोध करता है।
- संघर्ष के बीच भारतीय जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा
- ऊर्जा सुरक्षा:
- तेल और गैस की आपूर्ति बनाए रखने के लिए आपूर्तिकर्ताओं के साथ निरंतर संपर्क।
- रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार 53 लाख मीट्रिक टन है, जिसे बढ़ाकर 65 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य है।
- 11 वर्षों में शोधन क्षमता में वृद्धि।
- खाद्य सुरक्षा:
- किसानों द्वारा पर्याप्त खाद्यान्न भंडार सुनिश्चित किया गया है।
- पर्याप्त उर्वरक उपलब्धता के साथ खरीफ की बुवाई की तैयारी।
- बिजली की आपूर्ति:
- गर्मी के मौसम में बिजली की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त कोयले का भंडार मौजूद है।
- लगातार दो वर्षों तक एक अरब टन से अधिक कोयले का रिकॉर्ड उत्पादन।
पश्चिम एशिया में भारत के रणनीतिक हित
- खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय प्रवासी मौजूद हैं, जो इस क्षेत्र में भारत की स्थिति को प्रभावित करते हैं।
- प्रभावित जलक्षेत्र में वाणिज्यिक जहाजों पर भारतीय चालक दल के सदस्यों की संख्या अधिक है।
- भारतीयों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और निकासी प्रयासों को सुगम बनाना, जिसके तहत 3.75 लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाला गया।
मानवीय प्रयास
- मृतकों और घायलों के परिवारों को आवश्यक सहायता और चिकित्सा उपचार मिल रहा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने संकट के समन्वित समाधान के महत्व और वैश्विक शांति एवं स्थिरता के प्रति भारत की प्रतिबद्धता पर जोर दिया।