विकास हेतु निवेश सुगमता (IFD) समझौते पर भारत का रुख
भारत विकासशील और गरीब देशों में निवेश प्रवाह को सुगम बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों का समर्थन करता है। हालांकि, भारत का मानना है कि निवेश सुगमीकरण संबंधी मामलों के लिए विश्व व्यापार संगठन (WTO) उपयुक्त मंच नहीं है।
विकास हेतु निवेश सुविधा (IFD) समझौता
- विश्व व्यापार संगठन (WTO) के 128 सदस्यों द्वारा समर्थित IFD समझौते का उद्देश्य विदेशी और राष्ट्रीय निवेशकों को आकर्षित करने के लिए निवेश नियमों में पारदर्शिता बढ़ाना है।
- इसका लक्ष्य प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के प्रवाह को सुगम बनाना और उच्च गुणवत्ता वाले निवेशों को लक्षित करना है, खासकर तब जब कई विकासशील देश कमजोर विकास और उच्च मुद्रास्फीति का सामना कर रहे हैं।
भारत की स्थिति
- भारत ने FDI समझौते में शामिल नहीं हुआ है और इसका विरोध करता है, क्योंकि वह इसे विश्व व्यापार संगठन के बहुपक्षीय स्वरूप को कमजोर करने वाला मानता है।
- यह प्रस्ताव केवल विश्व व्यापार संगठन के अनुबंध-4 के माध्यम से हस्ताक्षरकर्ता सदस्यों पर ही बाध्यकारी होने का प्रयास करता है।
- भारत के साथ-साथ कई देशों ने चीन के नेतृत्व वाले FDI प्रस्ताव के खिलाफ चिंता व्यक्त की है।
- भारत का तर्क है कि बहुपक्षीय समझौते विश्व व्यापार संगठन (WTO) वार्ता में हितों के संतुलन को कमजोर कर सकते हैं और कृषि सब्सिडी जैसे प्रमुख मुद्दों को हाशिए पर धकेल सकते हैं।
प्रमुख चिंताएँ और सिफ़ारिशें
- सार्वजनिक स्टॉकधारिता: भारत इस बात पर जोर देता है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) प्रणाली पर निम्न आय वाले किसानों की निर्भरता के कारण एक स्थायी समाधान महत्वपूर्ण है।
- मत्स्य पालन पर सब्सिडी: स्थिरता सुनिश्चित करने और मछुआरों की आजीविका की रक्षा करने के लिए संतुलित दृष्टिकोण की वकालत की जाती है। दूर-दराज के जलक्षेत्रों में मछली पकड़ने वाले देशों को अपनी क्षमता में आनुपातिक कमी करनी चाहिए।
- ई-कॉमर्स पर रोक: तेजी से विकसित हो रही डिजिटल अर्थव्यवस्था में हो रहे विकास, विशेष रूप से उभरती प्रौद्योगिकियों से संबंधित, का लाभ उठाने के लिए नीतिगत गुंजाइश की आवश्यकता पर जोर देती है।
मंत्रिस्तरीय सम्मेलन 14 (MC14) में भारत की भागीदारी
- भारत की भागीदारी रचनात्मक, संतुलित और विकासोन्मुखी होगी, जिसका ध्यान सार्थक WTO सुधारों पर केंद्रित होगा।
- भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) के बहुपक्षीय जनादेश का सम्मान करने, खाद्य सुरक्षा को प्राथमिकता देने और किसानों और मछुआरों की आजीविका की रक्षा करने के महत्व पर जोर देगा।
- भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल करेंगे, जिसमें वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल होंगे।