वित्तीय प्रबंधन और वैश्विक आर्थिक चुनौतियों का अवलोकन
पश्चिम एशिया संघर्ष के प्रणालीगत प्रभाव
- यह संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दे से बढ़कर वैश्विक आर्थिक चिंता का विषय बन गया है।
- यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए खतरा पैदा करता है और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था में हो रहे बदलावों में योगदान देता है।
भारत की आर्थिक लचीलापन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत की सुदृढ़ आर्थिक रणनीतियों पर जोर दिया:
- वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, भारत अपनी पूंजी निवेश जारी रखने के लिए एक मजबूत स्थिति बनाए रखता है।
- देश ने ब्याज दरों में कटौती करने और लक्षित क्षेत्रीय समर्थन प्रदान करने में सफलता हासिल की है।
- प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में भारत का ऋण-से-जीडीपी अनुपात सबसे कम 81% है, जो जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर है।
विवेकपूर्ण सार्वजनिक वित्त प्रबंधन
भारत के राजकोषीय प्रबंधन की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- मोदी सरकार के नेतृत्व में उपभोग-आधारित घाटे से निवेश-आधारित राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की ओर बदलाव।
- भावी पीढ़ियों पर ऋण का बोझ पड़ने से बचने के लिए संसाधनों का प्रभावी आवंटन।
वैश्विक ऋण परिदृश्य
भारत की राजकोषीय स्थिति की वैश्विक रुझानों से तुलना:
- वैश्विक ऋण वैश्विक जीडीपी का 95% है, जबकि भारत का सरकारी ऋण उसकी जीडीपी का 81% है।
- अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि 2030 तक भारत का ऋण अनुपात घटकर 75.8% हो जाएगा।
- इसके विपरीत, अमेरिका, चीन और जर्मनी जैसी विकसित अर्थव्यवस्थाओं में ऋण स्तर में वृद्धि होने की उम्मीद है।