वैश्विक खाद्य प्रणालियों पर अत्यधिक गर्मी का प्रभाव
खाद्य एवं कृषि संगठन और विश्व मौसम विज्ञान संगठन की एक संयुक्त रिपोर्ट वैश्विक खाद्य प्रणालियों के लिए अत्यधिक गर्मी से उत्पन्न गंभीर खतरों पर प्रकाश डालती है।
मुख्य निष्कर्ष
- आजीविका के लिए खतरे: 1.23 अरब से अधिक लोग कृषि पर निर्भर हैं, जो बढ़ती गर्मी के तनाव का सामना कर रहे हैं, जिससे फसलें, पशुधन और मत्स्य पालन प्रभावित हो रहे हैं।
- फसल उत्पादन में होने वाली हानियाँ:
- मक्का और गेहूं जैसी मुख्य फसलों की पैदावार में प्रति 1 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि पर क्रमशः 7.5% और 6% की गिरावट देखी गई है।
- अनुमानों के अनुसार, तापमान में प्रति डिग्री वृद्धि से उपज में 10% तक की कमी हो सकती है।
- मानव स्वास्थ्य जोखिम:
- कृषि क्षेत्र के श्रमिकों को अन्य क्षेत्रों की तुलना में गर्मी के संपर्क में आने से मरने का खतरा 35 गुना अधिक होता है।
- अत्यधिक गर्मी के कारण प्रतिवर्ष 470 अरब कार्य घंटे बर्बाद हो जाते हैं।
- क्षेत्रीय प्रभाव: सदी के अंत तक भारत सहित दक्षिण एशिया में प्रति वर्ष 250 तक असुरक्षित कार्य दिवस हो सकते हैं।
- लैंगिक असमानताएं: खराब स्वच्छता, अपर्याप्त पानी और लंबे कामकाजी घंटों के कारण महिलाएं असमान रूप से प्रभावित होती हैं।
भारत पर विशिष्ट प्रभाव
- चावल उत्पादन: गंगा-सिंधु बेसिन को प्रभावित करने वाली लू के कारण भारत, जो चावल का एक प्रमुख उत्पादक देश है, में उत्पादन में कमी देखी जा सकती है।
- श्रम क्षमता: उच्च उत्सर्जन परिदृश्यों के तहत फसल के मौसम के दौरान औसत श्रम क्षमता में 40% से नीचे की गिरावट।
- मानसून और जल आपूर्ति:
- अल नीनो के कारण मानसून सामान्य से कम हो सकता है, और 2026 तक बारिश दीर्घकालिक औसत के 92-94% तक ही सीमित रह सकती है।
- भूमिगत जल स्तर में गिरावट और 2030 तक पानी की मांग और आपूर्ति के बीच 570 अरब घन मीटर के अनुमानित अंतर का अनुमान है।
- जलाशय का जलस्तर: फरवरी से अप्रैल के बीच जलाशय में पानी का भंडारण 69% से घटकर 45% हो गया है।
व्यापक पर्यावरणीय प्रभाव
- गर्मी एक जोखिम कारक के रूप में:
- इससे सूखा और भी गंभीर हो जाता है, मिट्टी में नमी कम हो जाती है, कीट फैलते हैं, पशुधन पर दबाव पड़ता है और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र बाधित होता है।
- समुद्री प्रभाव: वैश्विक महासागर के 90% से अधिक हिस्से में समुद्री तापप्रसव का अनुभव हुआ, जिससे वैश्विक मत्स्य पालन का 15% प्रभावित हुआ।
- आर्थिक नुकसान: मत्स्य उत्पादन में 56 लाख टन से अधिक का नुकसान हुआ है, जिससे 66 लाख डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है।
सिफारिशों
- अनुकूली रणनीतियाँ:
- पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करना।
- गर्मी सहन करने वाली फसलों में निवेश करना।
- जल और जलाशय प्रबंधन को बेहतर बनाना।
- श्रमिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- डिजिटल विस्तार सेवाओं का विस्तार करना।
- शमन की आवश्यकताएँ: बढ़ते तापमान से निपटने के लिए अनुकूलन और शमन दोनों प्रकार के उपायों की आवश्यकता है।