NEET परीक्षा विवाद: एक विस्तृत विश्लेषण
पृष्ठभूमि और हाल की घटनाएँ
मई 2024 में, भारत में मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए महत्वपूर्ण परीक्षा, राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में लगभग 22 लाख उम्मीदवार शामिल हुए। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने घोषणा की कि परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी, जिसके कारण पुनः परीक्षा आवश्यक हो गई।
- इस फैसले से छात्रों में व्यापक असंतोष फैल गया, जिसके चलते फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए या तो एनटीए के प्रतिस्थापन या पर्याप्त सुधारों की मांग की।
ऐतिहासिक संदर्भ और चुनौतियाँ
पिछले वर्षों में NEET परीक्षा में पेपर लीक होने की चिंताओं ने काफी परेशानी खड़ी की है:
- 2024 में, NEET के परिणाम राष्ट्रीय चुनाव परिणामों के साथ मेल खा गए, जिसमें अभूतपूर्व संख्या में शीर्ष अंक प्राप्त करने वालों को पूरे अंक मिले, जिससे रैंक में भारी वृद्धि हुई।
- प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप सामने आए हैं, जिसमें बताया गया है कि लीक हुए प्रश्नपत्रों से 155 छात्रों को फायदा हुआ है।
प्रशासनिक परिवर्तन
2024 के बाद के विवादों के परिणामस्वरूप, उल्लेखनीय प्रशासनिक परिवर्तन हुए:
- आईएएस अधिकारी सुबोध कुमार सिंह, जो एनटीए के पूर्व महानिदेशक थे, का तबादला कर दिया गया। उनकी जगह इंडियाएआई मिशन के पूर्व सीईओ अभिषेक सिंह ने पदभार संभाला और "शून्य त्रुटि, शून्य सहनशीलता" की नीति लागू की।
- सुरक्षा उपायों को बढ़ाने के बावजूद, 2026 की परीक्षा से पहले एक "अनुमानित प्रश्नपत्र" प्रसारित हो रहा था, जो लगातार कमजोरियों को दर्शाता है।
प्रस्तावित सुधार और चुनौतियाँ
इसरो के पूर्व अध्यक्ष के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता वाली एक उच्च स्तरीय समिति ने महत्वपूर्ण बदलावों की सिफारिश की:
- जेईई मेन के समान कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) प्रारूप में परिवर्तन।
- वर्तमान पेन-एंड-पेपर मॉडल से जुड़े जोखिमों को कम करने के लिए कंप्यूटर-सहायता प्राप्त सुरक्षित पीपीटी का कार्यान्वयन।
हालांकि, NTA ने NM के लिए पूर्ण पैमाने पर CBT को लागू करने में आने वाली लॉजिस्टिकल चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
वर्तमान स्थिति और जांच
2024 और 2026 में हुए पेपर लीक के संबंध में चल रही जांच में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) भी शामिल है।
- 2024 के मामले में 45 व्यक्तियों के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किए गए थे, जबकि 2026 के लीक मामले में जांच जारी है।
छात्रों पर प्रभाव
पुनर्परीक्षा को लेकर बनी अनिश्चितता ने उम्मीदवारों के बीच काफी तनाव पैदा कर दिया है:
- दिल्ली की वामिका जैसी कई छात्राएं निरंतर पढ़ाई और दबाव के बीच अपने प्रदर्शन स्तर को बनाए रखने को लेकर चिंतित हैं।