ऑनलाइन गेमिंग पर GST को लेकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
एक महत्वपूर्ण कानूनी फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने वस्तु एवं सेवा कर (GST) अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों पर 28% पूर्वव्यापी कर लगाने के निर्णय को बरकरार रखा।
फैसले के मुख्य बिंदु
- पीठ का निर्णय: यह निर्णय न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति आर. महादेवन की पीठ द्वारा सुनाया गया।
- गतिविधियों की परिभाषा: अदालत ने "ऑनलाइन गेमिंग गतिविधियों, जिनमें फैंटेसी स्पोर्ट्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर खेले जाने वाले अन्य खेल शामिल हैं, जिनमें अनिश्चित परिणामों पर दांव लगाना शामिल है," को सट्टेबाजी और जुए के रूपों के रूप में परिभाषित किया।
- संवैधानिक वैधता:
- इन गतिविधियों पर GST लगाना संवैधानिक रूप से वैध है।
- यह संविधान के अनुच्छेद 366(12) और 366(12A) का पालन करता है, जो क्रमशः 'माल' और 'GST' को परिभाषित करते हैं।
संदर्भ और निहितार्थ
- मामले की पृष्ठभूमि: यह फैसला वस्तु एवं सेवा कर खुफिया महानिदेशालय द्वारा दायर अपील के समाधान के रूप में आया है। इस अपील में कर्नाटक उच्च न्यायालय के उस फैसले को चुनौती दी गई थी जिसमें गेम्सक्राफ्ट टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड को जारी कारण बताओ नोटिस को रद्द कर दिया गया था।
- वित्तीय प्रभाव: GST विभाग ने कंपनी से 21,000 करोड़ रुपये के भुगतान की मांग की।
- कानूनी मिसाल:
- इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने मई 2023 में हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी।
- इस मामले में यह विचार किया गया कि प्लेटफॉर्म पर मौजूद खेलों को कौशल के खेल (जिन पर 19% GST लगता है) या संयोग के खेल (जिन पर 28% GST लगता है) के रूप में वर्गीकृत किया जाना चाहिए या नहीं।