हाल ही में भारत सरकार ने 43 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है और 2025-26 के लिए 20,649 अतिरिक्त MBBS और PG (परास्नातक) सीटों की वृद्धि की है। इसके बावजूद, ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में सार्वजनिक स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता में अभी भी लगातार कमियां बनी हुई हैं।
सार्वजनिक स्वास्थ्य-देखभाल सेवा वितरण प्रणाली की चुनौतियां
- विशेषज्ञों की भारी कमी: ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) में स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लगभग 80% पद रिक्त हैं। 21,964 चिकित्सा विशेषज्ञों की आवश्यकता है लेकिन केवल 4,413 विशेषज्ञ ही उपलब्ध हैं।
- वर्ष 2014 के बाद 731 मेडिकल कॉलेजों में PG सीटें 72,627 बढ़ी हैं। इसके बावजूद ग्रामीण स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं में विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है।
- कमजोर स्वास्थ्य-देखभाल शासन ढांचा: 43 नए मेडिकल कॉलेजों में से 27 निजी संस्थान हैं। इनकी सार्वजनिक स्वास्थ्य-देखभाल कार्यबल में योगदान देने की जवाबदेही सीमित होती है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करने के प्रति डॉक्टरों की अनिच्छा: नए स्नातक विशेषज्ञ अक्सर दूरदराज और सुविधाओं से वंचित ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के लिए तैयार नहीं होते।
- त्रुटिपूर्ण बजटीय प्राथमिकताएं: स्वास्थ्य बजट में अधिक ध्यान अस्पताल भवन-निर्माण और अवसंरचना विकास पर है, लेकिन अस्पतालों के संचालन, कर्मचारियों और सेवाओं पर अपेक्षाकृत कम व्यय होता है।
सार्वजनिक स्वास्थ्य-देखभाल सेवा वितरण प्रणाली में सुधार के उपाय
- PG चिकित्सा शिक्षा को सार्वजनिक स्वास्थ्य-देखभाल आवश्यकताओं के अनुरूप बनाना: पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एडमिशन और विशेषज्ञ प्रशिक्षण को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और जिला अस्पतालों में रिक्त पदों से जोड़ा जाना चाहिए।
- प्रशिक्षु डॉक्टरों को किसी निर्धारित सरकारी स्वास्थ्य-देखभाल संस्थान में सेवा देने का शपथ-पत्र देना चाहिए। विशेष रूप से उन प्रशिक्षुओं को प्राथमिकता दी जा सकती है जो दुर्गम क्षेत्रों के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में 10 साल का सर्विस बॉण्ड भरने के लिए तैयार हों।
- ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा देने के लिए डॉक्टरों को प्रोत्साहन देना: इनमें अतिरिक्त भत्ता, आवास सुविधा, बच्चों के लिए अच्छी शिक्षा व्यवस्था, करियर विकास के अवसर देना शामिल हैं।
- “ऑल या नन” नियुक्ति रणनीति अपनाना: किसी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में या तो सभी आवश्यक पाँच विशेषज्ञों की पूरी टीम तैनात की जाए, या फिर किसी भी विशेषज्ञ की तैनाती न हो। इससे कार्यभार का बेहतर वितरण सुनिश्चित किया जा सकता है।
स्वास्थ्य-देखभाल प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए की गई पहलें
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