हाल ही में स्वास्थ्य पर घरेलू सामाजिक उपभोग (Household Social Consumption on Health) से संबंधित 80वें चक्र का सर्वेक्षण जारी किया गया।
सर्वेक्षण के प्रमुख निष्कर्ष
- कम ‘आउट ऑफ पॉकेट व्यय (OOPE)’: सरकारी (लोक) अस्पतालों में भर्ती होने वाले आधे से अधिक मामलों में मरीजों को अपनी जेब से अब केवल लगभग 1,100 रुपये ही खर्च करना पड़ता है।
- मातृत्व देखभाल की बेहतर सुविधा: संस्थागत प्रसव (अस्पताल में होने वाले प्रसव) दर ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़कर 95.6% और शहरी क्षेत्रों में 97.8% हो गई।
- बीमारी के मामलों में परिवर्तन: संक्रामक रोगों के कुल मामलों में गिरावट दर्ज की गई है, जबकि मधुमेह और हृदय रोग जैसे गैर-संचारी रोगों (NCDs) के मामले बढ़ रहे हैं।
- स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं तक बेहतर पहुंच: सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में बाह्य रोगी (OPD) उपचार का औसत (मीडियन) खर्च शून्य है। 1.84 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAMs) इस सेवा को बेहतर बनाने में योगदान कर रहे हैं।
- सरकारी स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं का बढ़ता उपयोग: एनएसओ सर्वेक्षण यह भी दर्शाता है जहाँ 2014 में लगभग 28% ग्रामीण आबादी बाह्य रोगी (OPD) इलाज के लिए सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में जाती थी, वहीं 2025 में यह दर बढ़कर 35% हो गई। ऐसा प्राथमिक स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं के विस्तार के कारण संभव हुआ है।
- बीमा कवरेज में विस्तार: देश में सरकारी स्वास्थ्य बीमा योजनाओं के तहत कवर होने वाली आबादी का प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में 12.9% से बढ़कर 45.5% और शहरी क्षेत्रों में 8.9% से बढ़कर 31.8% हो गया।
स्वास्थ्य-देखभाल से संबंधित प्रमुख पहलें
- बीमा योजनाएं: प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (PM-JAY) के तहत गरीब और कमजोर परिवारों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक का स्वास्थ्य बीमा कवरेज प्रदान किया जाता है।
- दवाइयां: ‘उपचार के लिए वहनीय दवाइयां और विश्वसनीय प्रत्यारोपण (AMRIT), प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना (PMBJP) जैसी योजनाएं शुरू की गई हैं।
- मातृत्व देखभाल: जननी सुरक्षा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान जैसी पहलें माँ और शिशु को बेहतर स्वास्थ्य-देखभाल सेवाएं प्रदान करती हैं।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM): इसके तहत "निशुल्क औषधि सेवा पहल (FDSI)' और ‘निशुल्क जांच पहल (FDI)’ के माध्यम से मुफ्त दवाइयाँ और जांच उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे दूरदराज क्षेत्रों में स्वास्थ्य-देखभाल सेवाओं तक पहुंच बेहतर हुई है।