भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन 2023
यह शिखर सम्मेलन आसियान शिखर सम्मेलन और जी7 शिखर सम्मेलन जैसे अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों में पूर्व में हुई बैठकों की पृष्ठभूमि में आयोजित किया जा रहा है।
ऐतिहासिक संदर्भ और रणनीतिक साझेदारी
- भारत-जापान संबंधों में महत्वपूर्ण विकास हुआ है, जिसकी विशेषताएँ हैं:
- वैश्विक साझेदारी (2000)
- रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी (2006)
- विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी (2014)
- ये साझेदारियां साझा मूल्यों और रणनीतिक दृष्टिकोण से मजबूत होती हैं तथा भारत की एक्ट ईस्ट नीति और हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) को जापान की मुक्त और खुली हिंद-प्रशांत (FOIP) नीति के साथ संरेखित करती हैं।
- जापान भारत का सबसे बड़ा ODA दाता है और क्वैड तथा अन्य बहुपक्षीय मंच में एक प्रमुख साझेदार है।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
- प्रमुख समझौतों में शामिल हैं:
- सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा (2008)
- रक्षा सहयोग और आदान-प्रदान समझौता ज्ञापन (2014)
- सूचना संरक्षण समझौता (2015)
- आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक प्रावधान समझौता (2020)
- मालाबार, मिलान, जिमेक्स और धर्म गार्जियन जैसे नियमित सैन्य अभ्यास अंतर-संचालनीयता को बढ़ाते हैं।
- बदलते सुरक्षा परिवेश को प्रतिबिंबित करने के लिए 2008 के सुरक्षा सहयोग ढांचे को अपडेट करने की योजना है।
व्यापार और निवेश
- 2023-24 में द्विपक्षीय व्यापार 22.8 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया, जिसमें आयात निर्यात से अधिक होगा।
- दिसंबर 2024 तक 43.2 बिलियन डॉलर के संचयी निवेश के साथ जापान भारत में FDI का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत है।
- उभरते फोकस क्षेत्रों में डिजिटल सहयोग, स्वच्छ ऊर्जा और आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन शामिल हैं।
- 2026 तक निवेश लक्ष्य को संशोधित कर 7-10 ट्रिलियन येन करने की योजना पर काम चल रहा है।
विकास और बुनियादी ढांचा सहयोग
- जापान 1958 से ही भारत की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं का प्रमुख समर्थक रहा है।
- मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल परियोजना इस सहयोग का उदाहरण है, जिसमें जापान से पर्याप्त धनराशि प्राप्त हुई है।
बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग
- क्वाड जैसी पहलों में सहयोग का ध्यान स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र को सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।
- आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन पहल (SCRI) का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाना और उन्हें सुरक्षित बनाना है।
लोगों के बीच संपर्क, संस्कृति और शिक्षा
- वर्ष 2023-24 को भारत और जापान के बीच पर्यटन आदान-प्रदान वर्ष के रूप में मनाया गया।
- एडु-कनेक्ट जैसे प्लेटफार्मों द्वारा समर्थित शैक्षणिक साझेदारियों की संख्या बढ़ रही है।
- जापान में भारतीय प्रवासियों की संख्या लगभग 54,000 है, जिनमें मुख्य रूप से IT पेशेवर और इंजीनियर शामिल हैं।
- शिखर सम्मेलन का उद्देश्य सांस्कृतिक और शैक्षिक आदान-प्रदान को बढ़ाना तथा जनसांख्यिकीय चुनौतियों का समाधान करना है।