राजनीतिक तनाव के बीच भारत-अमेरिका सहयोग
2025 में, भारत-अमेरिका संबंधों में राजनीतिक तनाव देखने को मिल रहा है, जिसका मुख्य कारण भारत में होने वाला क्वाड नेताओं का शिखर सम्मेलन है जिसका स्थगन है। इन चुनौतियों के बावजूद, विशेषकर रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में मजबूत सहयोग जारी है।
राजनीतिक और आर्थिक गतिशीलता
- भारत पर अमेरिका के व्यापार प्रतिबंधों और पाकिस्तान के साथ उसके सुधरते संबंधों ने राजनीतिक संबंधों में तनाव पैदा कर दिया है।
- इन तनावों के परिणामस्वरूप अमेरिका को भारत के निर्यात में भारी गिरावट आई है।
- भारत द्वारा रूस से खरीदे जाने वाले कच्चे तेल पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ के कारण आर्थिक तनाव बना हुआ है, जबकि चीन और पाकिस्तान को अनुकूल शर्तें प्राप्त हैं।
- भारत को अमेरिका और चीन के बीच संबंधों में सुधार नजर आ रहा है, जिसका असर उसकी राजनयिक नीति पर पड़ रहा है।
संस्थागत और रक्षा सहयोग
- राजनीतिक तनाव के बावजूद, संस्थागत सहभागिता में तेजी आई है।
- जुलाई 2025 में क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में समुद्री सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में नई पहलों की शुरुआत की गई।
- क्वाड के आतंकवाद-विरोधी कार्य समूह ने अपनी तीसरी बैठक आयोजित की, जिसमें राजनीतिक मुद्दों से परे परिचालन प्रासंगिकता को सुदृढ़ किया गया।
- 2025 के रक्षा ढांचागत समझौते द्वारा मजबूत किया गया रक्षा सहयोग, संयुक्त समन्वय, सूचना साझाकरण और तकनीकी सहयोग पर ध्यान केंद्रित करते हुए, मजबूत बना हुआ है।
प्रमुख घटनाक्रम और समझौते
- 2008 में भारत-अमेरिका के बीच हुए नागरिक परमाणु समझौते के बाद से रक्षा और प्रौद्योगिकी समझौते लगातार मजबूत होते गए हैं।
- प्रमुख समझौतों में निम्नलिखित शामिल हैं:
- 2023 भारत-अमेरिका रक्षा त्वरण परिवेश (INDUS-X)
- लॉजिस्टिक्स एक्सचेंज समझौता ज्ञापन (LEMOA, 2016)
- संचार अनुकूलता और सुरक्षा समझौता (COMCASA, 2018)
- बुनियादी विनिमय एवं सहयोग समझौता (BECA, 2020)
- आपूर्ति सुरक्षा व्यवस्था (MoSA, 2024)
- अमेरिका और भारत की नासा-ISRO की संयुक्त परियोजना, NISAR उपग्रह, जिसे जुलाई 2025 में लॉन्च किया गया था, तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है।
क्षेत्रीय और अवसंरचनात्मक सहयोग
- नवंबर 2025 में, मुंबई में आयोजित पहले क्वाड पोर्ट्स ऑफ द फ्यूचर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य लचीले और सुरक्षित बंदरगाहों का विकास करना था।
- यह पहल क्वाड सहयोग में गुणवत्तापूर्ण अवसंरचना विकास के महत्व को रेखांकित करती है, जिससे क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलता है।
निष्कर्ष और भविष्य की संभावनाएं
राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद, भारत-अमेरिका संबंध मजबूत संस्थागत ढांचों के माध्यम से लगातार विकसित हो रहे हैं। राजनीतिक और संस्थागत जुड़ावों की यह दोहरी गतिशीलता विश्वास और लचीलेपन को बढ़ावा देती है, जिससे साझेदारी भू-राजनीतिक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना कर पाती है। आगे बढ़ते हुए, दोनों देशों को मजबूत और दीर्घकालिक साझेदारियों के निर्माण के लिए संस्थागत समझ को गहरा करना होगा और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करना होगा।