भारत में वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गजों द्वारा निवेश में उछाल
भारत में वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गजों द्वारा महत्वपूर्ण निवेश देखा गया है, जो AI-संचालित डिजिटलीकरण, निर्यात और रोजगार सृजन पर केंद्रित है।
- अमेज़न: 2030 तक 35 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश करने का वादा किया है।
- माइक्रोसॉफ्ट ने क्लाउड, AI इंफ्रास्ट्रक्चर और कौशल विकास के लिए 17.5 बिलियन डॉलर की घोषणा की, जो एशिया में इसका अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।
- गूगल: अमेरिका के बाहर विशाखापत्तनम में अपना सबसे बड़ा AI और डेटा-सेंटर हब स्थापित करने के लिए 15 अरब डॉलर का निवेश कर रहा है।
- मेटा: एंटरप्राइज AI प्लेटफॉर्म के लिए रिलायंस के साथ साझेदारी की है और आंध्र प्रदेश में 500 मेगावाट के डेटा सेंटर की संभावना तलाश रही है।
इन निवेशों को प्रेरित करने वाले कारकों में विशाल डिजिटल उपभोक्ता आधार, किफायती डेटा, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचा और नीतिगत स्थिरता को बढ़ावा देने वाले डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम जैसे नियामक उपाय शामिल हैं।
डेटा-सेंटर उद्योग के विकास
भारत का डेटा सेंटर उद्योग विभिन्न शहरों में नई सुविधाओं के साथ विस्तार कर रहा है, जिसके लिए बिजली और पानी जैसे महत्वपूर्ण संसाधनों की आवश्यकता होती है।
- डेटा केंद्रों को उन्नत शीतलन प्रणालियों, फाइबर-ऑप्टिक कनेक्टिविटी और सबसी केबल लिंक की आवश्यकता होती है।
- पर्यावरण संबंधी चिंताओं के कारण बिजली स्रोतों, शीतलन प्रौद्योगिकियों और जल के पुन: उपयोग के संबंध में सावधानीपूर्वक डिजाइन विकल्प चुनना आवश्यक हो जाता है।
गूगल की विशाखापत्तनम परियोजना, जिसमें अदानी और भारती एयरटेल जैसे साझेदारों का सहयोग है, यह दर्शाती है कि इस तरह के निवेश स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को कैसे प्रभावित कर सकते हैं, जिससे लगभग 180,000 नौकरियां पैदा हो सकती हैं।
वैश्विक क्षमता केंद्रों (GCC) की भूमिका और विकास
GCC देश नवाचार केंद्रों के रूप में विकसित हो रहे हैं, जहां 92% नेता मूल्य सृजन में, विशेष रूप से जनरेटिव AI को तैनात करने में, अपनी भूमिका को पहचानते हैं।
अमेरिका और भारत के बीच तनाव के बावजूद, अमेरिकी कंपनियां भारत के रणनीतिक महत्व और दीर्घकालिक क्षमता को लेकर आश्वस्त हैं।
चुनौतियाँ और अवसर
- भारत से प्रतिवर्ष 15 लाख से अधिक इंजीनियरिंग स्नातकों का उत्पादन और वैश्विक सेमीकंडक्टर डिजाइन कार्यबल में इसकी महत्वपूर्ण हिस्सेदारी इसकी आकर्षण क्षमता को बढ़ाती है।
- ऐसे क्षेत्रों में डेटा सेंटर स्थापित करने की आवश्यकता है जहां नवीकरणीय ऊर्जा प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हो।
- पानी की अधिक खपत करने वाली शीतलन प्रणालियों के विकल्पों को बड़े पैमाने पर अपनाना आवश्यक है, खासकर जल संकट वाले क्षेत्रों में।
नॉर्डिक देशों से सबक लिया जा सकता है, जो डेटा केंद्रों के लिए लगभग 100% नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग कर रहे हैं और अपशिष्ट ऊष्मा का पुन: उपयोग कर रहे हैं।
AI वैल्यू चेन में आगे बढ़ने के लिए कौशल विकास और अनुसंधान एवं विकास में निरंतर निवेश के साथ-साथ बड़े और छोटे डेटा केंद्रों के बीच मांग को वितरित करके क्षमता को संतुलित करना महत्वपूर्ण है।