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मलयालम भाषा विधेयक, 2025

15 Jan 2026
1 min

मलयालम भाषा विधेयक, 2025

अवलोकन

मलयालम भाषा विधेयक, 2025 का उद्देश्य मलयालम को केरल की आधिकारिक भाषा के रूप में नामित करना है, साथ ही संवैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए सरकार, शिक्षा, न्यायपालिका, सार्वजनिक संचार, वाणिज्य और डिजिटल क्षेत्र जैसे विभिन्न क्षेत्रों में इसके उपयोग को अनिवार्य बनाना है।

विधेयक के प्रावधान

  • आधिकारिक भाषा का अधिग्रहण: मलयालम आधिकारिक भाषा होगी, जो वर्तमान में अंग्रेजी और मलयालम की दोहरी मान्यता का स्थान लेगी।
  • शिक्षा:
    • सभी सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 10 तक मलयालम को अनिवार्य प्राथमिक भाषा बनाया जाएगा।
    • सभी निर्णयों और अदालती कार्यवाही का अनुवाद चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा।
    • मलयालम में विधेयक और अध्यादेश पेश किए जाएंगे।
  • प्रौद्योगिकी: IT विभाग IT में मलयालम के कुशल उपयोग के लिए ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर विकसित करेगा।
  • प्रशासनिक परिवर्तन:
    • कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग का नाम बदलकर मलयालम भाषा विकास विभाग किया जाएगा।
    • मलयालम भाषा विकास निदेशालय का गठन किया जाएगा।

पृष्ठभूमि

यह विधेयक असफल मलयालम भाषा (प्रसार एवं संवर्धन) विधेयक, 2015 के बाद आया है, जिसे राष्ट्रपति ने राजभाषा अधिनियम, 1963 और अन्य शैक्षिक प्रावधानों के साथ विरोधाभास के कारण रोक दिया था। नया विधेयक इन कमियों को दूर करता है।

विधेयक का विरोध

  • कर्नाटक सरकार इस विधेयक का असंवैधानिक बताकर विरोध कर रही है, क्योंकि उसे केरल में, विशेषकर कासरगोड में, कन्नड़ भाषी अल्पसंख्यक समुदाय पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने का डर है। 
  • विद्यालयों में मलयालम को प्रथम भाषा के रूप में अनिवार्य किए जाने पर चिंताएं जताई जा रही हैं, जिससे कन्नड़ भाषी छात्रों के भाषाई अधिकारों पर असर पड़ रहा है।

केरल सरकार का रुख

  • इस विधेयक में भाषाई अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के प्रावधान शामिल हैं, जिससे सरकारी पत्राचार में उनकी भाषाओं के उपयोग की अनुमति मिलती है।
  • जिन छात्रों की मातृभाषा मलयालम नहीं है, वे राष्ट्रीय शिक्षा पाठ्यक्रम के अनुसार अपनी चुनी हुई भाषाओं में अध्ययन कर सकते हैं।
  • अन्य राज्यों और देशों के गैर-मलयालम भाषी छात्रों को उच्च कक्षाओं में मलयालम परीक्षा देने से छूट प्रदान की जाती है।

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संवैधानिक प्रावधान

ये भारतीय संविधान में उल्लिखित नियम और सिद्धांत हैं जो देश के शासन और नागरिकों के अधिकारों को नियंत्रित करते हैं। विधेयक को इन प्रावधानों का पालन करना होगा।

भाषाई अल्पसंख्यक

यह किसी राज्य या क्षेत्र की वह आबादी है जो उस राज्य या क्षेत्र की बहुसंख्यक भाषा से भिन्न भाषा बोलती है। विधेयक में इन अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के प्रावधान शामिल हैं।

ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर

यह एक प्रकार का सॉफ्टवेयर है जिसका सोर्स कोड सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होता है, जिससे कोई भी इसे देख, संशोधित और वितरित कर सकता है। IT विभाग IT में मलयालम के कुशल उपयोग के लिए ऐसे सॉफ्टवेयर विकसित करेगा।

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