वैश्विक कैंसर रोकथाम विश्लेषण
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और इसकी अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (IARC) द्वारा किए गए एक नए विश्लेषण से पता चलता है कि दुनिया भर में कैंसर के दस में से चार मामलों को रोका जा सकता है। 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस से पहले जारी किए गए इस अध्ययन में कैंसर के 30 रोके जा सकने वाले कारणों पर प्रकाश डाला गया है।
मुख्य निष्कर्ष
- 2022 में कैंसर के सभी नए मामलों में से लगभग 37%, यानी लगभग 71 लाख मामले, ऐसे कारणों से जुड़े हैं जिनकी रोकथाम की जा सकती थी।
- कैंसर के प्रमुख रोके जा सकने वाले कारण निम्नलिखित हैं:
- तंबाकू : वैश्विक स्तर पर कैंसर के सभी नए मामलों में से 15% के लिए जिम्मेदार है।
- संक्रमण : कैंसर के 10% मामलों के लिए जिम्मेदार हैं।
- शराब का सेवन : कैंसर के 3% मामलों के लिए जिम्मेदार है।
भारत में कैंसर की रोकथाम
भारत में कैंसर के 37.1% मामले रोके जा सकते हैं, जो लगभग 520,000 मामलों के बराबर है। रोके जा सकने वाले कैंसर का बोझ महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक है।
आंकड़े
- पुरुषों में: 44.7% से अधिक कैंसर (305,000 से अधिक मामले) परिवर्तनीय जोखिम कारकों के कारण होते हैं।
- महिलाओं में: लगभग 30.5% कैंसर (लगभग 218,000 मामले) रोके जा सकते हैं।
पुरुषों में रोके जा सकने वाले कैंसर
- तंबाकू धूम्रपान : नए कैंसर मामलों में से 18.5% के लिए जिम्मेदार है।
- धुआं रहित तंबाकू और सुपारी : नए मामलों में इनका योगदान 7.7% है।
- संक्रमण : नए मामलों में से 7.6% संक्रमण के कारण होते हैं।
- रोके जा सकने वाले प्रमुख कैंसर:
- होंठ और मुख गुहा: 85,000 से अधिक मामलों को रोका जा सकता है।
- फेफड़ों का कैंसर: 45,000 से अधिक मामलों को रोका जा सकता है।
- पेट का कैंसर: 31,000 से अधिक मामलों को रोका जा सकता है।
महिलाओं में रोके जा सकने वाले कैंसर
- संक्रमण : नए कैंसर मामलों में से 20.2% संक्रमणों के कारण होते हैं।
- अपर्याप्त शारीरिक गतिविधि : नए मामलों में 2.7% का योगदान है।
- धुआं रहित तंबाकू और सुपारी : नए मामलों में इनका योगदान 2.4% है।
- रोके जा सकने वाले प्रमुख कैंसर:
- गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर: 127,000 से अधिक मामलों को रोका जा सकता है।
- स्तन कैंसर: 25,000 से अधिक मामलों को रोका जा सकता है।
- होंठ और मुख गुहा: 20,000 से अधिक मामलों को रोका जा सकता है।
राष्ट्रीय कार्यक्रम समीक्षा का महत्व
डॉ. पार्थ बसु ने गैर-संचारी रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम (NPNCD) की समीक्षा की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम में स्मार्ट उद्देश्यों का अभाव है, जिससे प्रगति की निगरानी करना कठिन हो जाता है।
प्राथमिकता वाले क्षेत्र
- भारत में गर्भाशय ग्रीवा और पेट के कैंसर संक्रमण से रोके जा सकने वाले महत्वपूर्ण कैंसर हैं।
- एचपीवी वैक्सीन लगवाने में देरी से सर्वाइकल कैंसर का खतरा बढ़ जाता है, खासकर निम्न सामाजिक-आर्थिक समूहों में।
- जी. पाइलोरी के दीर्घकालिक संक्रमण से जुड़े गैस्ट्रिक कैंसर के बारे में जागरूकता की कमी को दूर करने की आवश्यकता है।
- पीने योग्य पानी की उपलब्धता और स्वस्थ खाद्य भंडारण से गैस्ट्रिक कैंसर को कम किया जा सकता है।