स्वास्थ्य सेवा बजट का अवलोकन 2026
2026 के स्वास्थ्य सेवा बजट में कुछ क्षेत्रों में आक्रामक आवंटन दर्शाया गया है, हालांकि यह GDP के प्रतिशत के रूप में महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा व्यय की अपेक्षाओं से कम है।
- कुल आवंटन: 1.05 लाख करोड़ रुपये से अधिक, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से 10% अधिक है।
- सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में स्वास्थ्य बजट: लगभग 0.26%।
- कुल सरकारी व्यय के प्रतिशत के रूप में स्वास्थ्य बजट: लगभग 1.9%।
प्रमुख पहल और आवंटन
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बायोफार्मा शक्ति योजना सहित कई महत्वपूर्ण पहलों की शुरुआत की:
- बायोफार्मा शक्ति योजना: भारत को पांच वर्षों में बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स के विनिर्माण केंद्र में बदलने के लिए ₹10,000 करोड़ की पहल।
- नैदानिक परीक्षण अवसंरचना: 1,000 मान्यता प्राप्त नैदानिक परीक्षण स्थलों का नेटवर्क।
- तीन नए राष्ट्रीय औषध शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थानों (NIPER) की स्थापना।
- NIPER की सात मौजूदा इकाइयों का आधुनिकीकरण।
- उत्तर भारत में दूसरा NIMNHS परिसर स्थापित करना और दो उन्नत राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों का निर्माण करना।
प्रशिक्षण और देखभाल की वहनीयता
- प्रशिक्षण लक्ष्य: अगले पांच वर्षों में एक लाख संबद्ध स्वास्थ्य पेशेवरों और बुजुर्गों की देखभाल के लिए 1.5 लाख देखभाल कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करना।
- वहनीयता उपाय:
- 17 कैंसर की दवाओं और दुर्लभ बीमारियों के उपचारों को सीमा शुल्क और आयात शुल्क से छूट दी गई है।
- चिकित्सा और शिक्षा संबंधी प्रेषण पर स्रोत पर वसूले जाने वाले कर को 5% से घटाकर 2% कर दिया गया है।
आलोचना और चिंताएँ
जन स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने सरकार द्वारा 2017 की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति में उल्लिखित प्रावधान के अनुसार, 2025 तक स्वास्थ्य देखभाल के लिए आवंटन को GDP के 2.5% तक बढ़ाने से इनकार करने की आलोचना की है।
- राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन: निधि का निरंतर उपयोग होने के बावजूद निधि में गिरावट आई है।
- वित्तीय विकेंद्रीकरण ने राज्यों को स्वास्थ्य में अधिक निवेश करने में सक्षम बनाया है, लेकिन केंद्रीय निधि में कमी के कारण स्वास्थ्य देखभाल में असमान सुधार होने की आशंकाएं बनी हुई हैं।