समुद्री कृमि की नई प्रजाति की खोज
भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (ZSI) के शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से पश्चिम बंगाल के तटीय क्षेत्रों दीघा और बांकीपुट, पूर्वी मेदिनीपुर में समुद्री कृमियों (पॉलीकीट्स) की दो नई प्रजातियों की खोज की है। यह खोज महत्वपूर्ण मानवीय गतिविधियों और प्रदूषण के बावजूद उत्तरी बंगाल की खाड़ी की समृद्ध और नाजुक समुद्री जैव विविधता को उजागर करती है।
नई प्रजाति का विवरण
- नामालीकास्टिस सोलेनोटोग्नाथा
- यह नाम ग्रीक शब्दों "सोलेनोटोस" (चैनलयुक्त) और "ग्नाथा" (जबड़ा) से लिया गया है।
- इसमें एक अनोखी जबड़े की संरचना होती है जिसमें गूदे की गुहा से निकलने वाली कई नलिकाएं होती हैं।
- यह सल्फाइड से भरपूर, दुर्गंधयुक्त कीचड़ वाले मैदानों जैसे चरम वातावरण में पनपता है।
- यह आमतौर पर सड़ते हुए मैंग्रोव की लकड़ी और कठोर मिट्टी पर पाया जाता है।
- नेरिस धृतिया
- इसका नाम जेडएसआई की पहली महिला निदेशक धृति बनर्जी के नाम पर रखा गया है।
- यह रेतीले समुद्र तटों पर स्थित लकड़ी के खंभों में निवास करता है, जो उच्च ज्वार के दौरान जलमग्न हो जाते हैं।
पारिस्थितिक महत्व
- नेरीडिड कृमि पोषक तत्वों के चक्रण और तलछट के वातन में सहायता करके तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- ये प्रजातियां अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में पनपकर लचीलापन प्रदर्शित करती हैं, जो तटीय स्वास्थ्य निगरानी के लिए जैव संकेतक के रूप में उनकी क्षमता को दर्शाती हैं।
भविष्य की दिशाएं
इन प्रजातियों को पूरी तरह से समझने और इनके संरक्षण की संभावनाओं का पता लगाने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है। इनकी खोज से अब तक अज्ञात समुद्री जैव विविधता के संरक्षण के महत्व पर बल मिलता है।