AI इम्पैक्ट समिट कार्यक्रम और उससे संबंधित मुद्दे
AI इम्पैक्ट समिट का उद्देश्य प्रौद्योगिकी क्षेत्र में भारत के बढ़ते प्रभाव को प्रदर्शित करना था, जिसमें इसके संगठनात्मक कौशल और योगदान पर जोर दिया गया था।
- शिकायतें: प्रतिनिधि निम्नलिखित कारणों से असंतुष्ट थे:
- कार्यक्रम स्थल पर मोबाइल फोन की अनुमति नहीं है।
- VIP की आवाजाही के कारण व्यवधान उत्पन्न हुए।
- कारों पर प्रतिबंध के कारण परिवहन साधनों तक पहुँचने में असुविधाएँ।
- सुरक्षा उपाय: प्रतिबंध संभवतः सुरक्षा कारणों से लगाए गए थे, जैसे कि संभावित विस्फोटों को रोकना।
- संगठनात्मक चिंताएं: इस आयोजन ने भारत की इस तरह के अंतर्राष्ट्रीय आयोजनों को कुशलतापूर्वक संभालने की क्षमता पर सवाल खड़े किए।
पिछली घटनाओं से तुलना
यह शिखर सम्मेलन पेरिस में आयोजित AI एक्शन शिखर सम्मेलन के बाद हुआ, जो इसी तरह की समस्याओं के बिना सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिससे संगठनात्मक विसंगतियों पर प्रकाश डाला गया।
गलगोटियास विश्वविद्यालय में रोबोडॉग विवाद
सबसे ज्यादा चर्चा का विषय गैलगोटियास विश्वविद्यालय में चीनी रोबोडॉग की प्रदर्शनी को लेकर हुआ विवाद था।
- धोखाधड़ी के आरोप: रोबोडॉग, जिसे कथित तौर पर 39 मिलियन डॉलर के बजट से विकसित किया गया था, वास्तव में एक चीनी उत्पाद था जिसकी लागत 3,000 डॉलर से भी कम थी।
- ऐतिहासिक संदर्भ:
- भारत में भी इसी तरह की घटनाएं हुई हैं जहां मौजूदा तकनीक को रीब्रांड किया गया है।
- उदाहरण: IIT मद्रास द्वारा समर्थित ऑपरेटिंग सिस्टम भारओएस, एंड्रॉइड प्रोजेक्ट का ही नया रूप था।
- व्यापक निहितार्थ: भारत में AI अनुसंधान एवं विकास में किए गए वास्तविक निवेश और निधियों के उपयोग के तरीके को लेकर प्रश्न उठते हैं।
भारत के AI अनुसंधान एवं विकास पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव
इस घटना से भारत में AI अनुसंधान की सत्यनिष्ठा और गुणवत्ता को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिससे निवेशकों का विश्वास प्रभावित हो सकता है।
- भारत द्वारा एक मजबूत एआई अनुसंधान एवं विकास परिवेश के निर्माण के प्रयासों में पर्याप्त निवेश शामिल हैं, लेकिन इन निवेशों की प्रभावशीलता अब सवालों के घेरे में है।