होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी बाधित हुई
होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान का वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है, विशेष रूप से भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर। इस अवरोध के कारण वैश्विक तेल और गैस की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे खाना पकाने की गैस जैसी आवश्यक वस्तुओं पर असर पड़ा है।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया और बैठकें
- इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए ब्रिटेन द्वारा आयोजित 60 से अधिक देशों की बैठक में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने प्रतिनिधित्व किया।
- बैठक में "नौकायन की स्वतंत्रता" और "बाधारहित आवागमन" के सिद्धांतों पर जोर दिया गया।
- ब्रिटेन सरकार ने एक बयान जारी कर जलडमरूमध्य को तत्काल फिर से खोलने और इन सिद्धांतों का पालन करने पर जोर दिया।
बयान और चिंताएँ
- अध्यक्ष के बयान में इस बात पर जोर दिया गया कि ईरान का बंद होना वैश्विक समृद्धि के लिए खतरा पैदा करता है।
- ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के लिए राजनयिक और राजनीतिक उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।
- मिसरी ने भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर संकट के प्रभाव का उल्लेख करते हुए इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने मौजूदा संघर्ष में अपने नाविकों को खो दिया है।
प्रस्तावित उपाय
- ईरान को निर्बाध पारगमन की अनुमति देने के लिए संयुक्त राष्ट्र के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय राजनयिक दबाव बढ़ाना।
- यदि बंद जारी रहता है तो प्रतिबंधों सहित आर्थिक और राजनीतिक उपायों पर विचार करना।
- फंसे हुए जहाजों और नाविकों को मुक्त कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन के साथ सहयोग करना।
- बाजार और परिचालन संबंधी विश्वास को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त व्यवस्था स्थापित करना।
प्रभाव और वर्तमान स्थिति
जलडमरूमध्य के बंद होने से कतर, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत जैसे देश प्रभावित हुए हैं। भारत को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है, जिसमें तीन भारतीय नाविक मारे गए, एक लापता है और 18 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हुए हैं। भारतीय सरकार संकट के समाधान के लिए तनाव कम करने और कूटनीति एवं संवाद के माध्यम से आगे बढ़ने की वकालत करती है।