भारत में नकली कैंसर दवाओं की विस्तृत जांच
यह रिपोर्ट भारत में तेजी से बढ़ती कैंसर रोगियों की संख्या और नकली, महंगी कैंसर दवाओं की उपलब्धता के बीच खतरनाक अंतर्संबंध को उजागर करती है। यह रिपोर्ट पंजाब के एक लिवर कैंसर रोगी की दुर्दशा और नकली दवाओं के व्यापक बाजार पर केंद्रित है, विशेष रूप से मर्क एंड कंपनी द्वारा निर्मित उच्च मूल्य वाली कैंसर दवा कीट्रूडा को निशाना बनाती है।
कीट्रूडा और काला बाजार
- मरीज का अनुभव: 56 वर्षीय एक महिला ने चंडीगढ़ के पास PGIMER में लिवर कैंसर का इलाज शुरू कराया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें कीट्रूडा लेने की सलाह दी।
- कीट्रूडा की आधिकारिक बाजार कीमत 100 मिलीग्राम की शीशी के लिए 1.5 लाख रुपये से अधिक है।
- परिवार ने लगभग 16 लाख रुपये में छूट पर 12 शीशियां खरीदीं, लेकिन बाद में पता चला कि वे नकली थीं और उनमें एंटीफंगल दवा भरी हुई थी।
- नकली दवाओं के बाजार का विस्तार: जांच से पता चलता है कि नेपाल से लेकर मैक्सिको तक एक काला बाजार संचालित हो रहा है, जो कीट्रूडा जैसी कैंसर की दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित कर रहा है।
- भारत में दवाओं की जालसाजी एक आम समस्या है, जो एंटीबायोटिक्स से लेकर एंटासिड तक विभिन्न प्रकार की दवाओं को प्रभावित करती है।
- इंडियन एक्सप्रेस की जांच में नकली कीट्रूडा के बैच नंबर मिले जो दिल्ली के शीर्ष अस्पतालों में मरीजों को दी गई दवाओं के बैच नंबरों से मेल खाते थे।
जांच विवरण
- ऑपरेशन का विवरण: नकली दवा बनाने के इस ऑपरेशन में खाली कीट्रूडा की शीशियों को इकट्ठा करना, उनमें अन्य पदार्थ भरना और उन्हें कम कीमतों पर बेचना शामिल था।
- नकली शीशियां 90,000 रुपये प्रति 100 मिलीग्राम की शीशी के हिसाब से बेची गईं, जो बाजार मूल्य से 40% की छूट थी।
- प्रमुख व्यक्ति और गिरफ्तारियां: जांच के परिणामस्वरूप नकली दवाओं की आपूर्ति श्रृंखला में उनकी भूमिका के लिए "वितरक" नीरज चौहान के साथ-साथ कई फार्मासिस्टों को गिरफ्तार किया गया।
- प्रमुख कैंसर अस्पतालों में कार्यरत फार्मासिस्टों को सामान्य सामान में अर्ध-भरी शीशियाँ ले जाते हुए पकड़ा गया।
- गिरफ्तार किए गए प्रमुख लोगों में नीरज चौहान, कोमल तिवारी और अभिनय शामिल हैं, जो नकली दवाओं के वितरण और कारोबार में शामिल थे।
अस्पताल संबंधी खामियां और उनके समाधान
- अस्पताल प्रणालियों की भेद्यता:
- अस्पतालों में इस्तेमाल की गई शीशियों की गिनती के लिए कोई औपचारिक प्रक्रिया नहीं थी, जिससे निपटान स्थल पर ही उनका दुरुपयोग संभव हो पाता था।
- निगरानी उपायों के बावजूद, दवाओं के प्रबंधन और निपटान में मौजूद महत्वपूर्ण खामियों का फायदा नकली दवाओं के नेटवर्क ने उठाया।
- अस्पताल द्वारा उठाए गए कदम: आरजीसीआईआरसी और वेंकटेश्वर अस्पताल जैसे अस्पतालों ने भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त प्रोटोकॉल लागू किए हैं।
- इन बदलावों में रोगी परिचारकों की उपस्थिति में तैयार दवाओं का मिश्रण, CCTV निगरानी और दस्तावेजीकृत निपटान प्रक्रियाएं शामिल हैं।
प्रभाव और निष्कर्ष
- मरीजों पर प्रभाव: नकली दवाओं के कारोबार का मरीजों पर आर्थिक और स्वास्थ्य दोनों ही दृष्टि से गंभीर प्रभाव पड़ता है, जैसा कि बिहार की 38 वर्षीय महिला जैसे दुखद मामलों में स्पष्ट है।
- किफायती इलाज की तलाश में बेताब मरीज अक्सर अनजाने में अनौपचारिक माध्यमों से नकली दवाएं खरीदने के जाल में फंस जाते हैं।
- कानून प्रवर्तन और नियामक प्रतिक्रिया: यह जांच कैंसर के इलाज की तलाश कर रहे कमजोर रोगियों की सुरक्षा के लिए मजबूत निगरानी और सुरक्षा तंत्र की तत्काल आवश्यकता को उजागर करती है।
- अधिकारी गंभीर रूप से बीमार मरीजों की सुरक्षा के लिए नकली दवाओं के नेटवर्क का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने का काम जारी रखे हुए हैं।