भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता (FTA)
भारत और न्यूजीलैंड ने एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसे साल के अंत तक लागू किया जाना है। यह समझौता पिछले पांच वर्षों में भारत का सातवां मुक्त व्यापार समझौता है।
एफटीए की प्रमुख विशेषताएं
- भारत को 100% शुल्क-मुक्त बाजार पहुंच प्राप्त होगी।
- न्यूजीलैंड द्वारा 15 वर्षों में 20 अरब डॉलर के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की प्रतिबद्धता।
- भारतीयों के लिए श्रम गतिशीलता में वृद्धि और गतिशीलता के नए रास्ते।
व्यापार और शुल्क विवरण
- सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त करने से भारतीय निर्यात जैसे वस्त्र, परिधान, चमड़ा और ऑटो कंपोनेंट को लाभ होगा।
- भारत न्यूजीलैंड के 95% निर्यात को कवर करते हुए लगभग 70% टैरिफ लाइनें खोलेगा, जिससे डेयरी और चीनी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
- सेब, कीवी, मानुका शहद और एल्ब्यूमिन जैसी वस्तुओं के आयात के लिए विशिष्ट शर्तें लागू होती हैं।
- न्यूजीलैंड की शराब पर मूल्य श्रेणियों के आधार पर टैरिफ में कटौती।
सेवाएं और गतिशीलता
- न्यूजीलैंड 118 क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं प्रदान करता है और 139 क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र (MFN) का दर्जा प्राप्त है।
- भारत 106 क्षेत्रों में सेवाओं के बाजार तक पहुंच और 45 क्षेत्रों में MFN उपचार प्रदान करता है।
- प्रमुख प्रावधानों में 20 घंटे का छात्र कार्य अधिकार, अध्ययन के बाद के वीजा, 5,000 कुशल श्रमिक स्लॉट और प्रति वर्ष 1,000 कार्य-और-छुट्टी वीजा शामिल हैं।
भारत के सेवा निर्यात 400 अरब डॉलर से अधिक हो गए हैं, लेकिन इनमें से केवल 650-700 मिलियन डॉलर मूल्य के निर्यात न्यूजीलैंड को भेजे जाते हैं, जो विकास के अवसर प्रस्तुत करते हैं।
निवेश और आर्थिक निहितार्थ
- ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव के अजय श्रीवास्तव ने 20 अरब डॉलर के निवेश के वादे की संभावनाओं पर प्रकाश डाला है, लेकिन साथ ही सतर्क दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया है।
- न्यूजीलैंड का औसत आयात शुल्क 2.3% है, जो भारतीय निर्यातकों को मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से पहले भी पर्याप्त बाजार पहुंच प्रदान करता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और रणनीतिक महत्व
दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता शुरू में अप्रैल 2010 में शुरू हुई थी, लेकिन 2015 में समाप्त हो गई। यह समझौता 2019 में क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी से भारत की वापसी के अनुरूप है।
कथन और भविष्य की संभावनाएं
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल और न्यूजीलैंड की निवेश प्रतिबद्धताओं के बीच तालमेल पर जोर दिया। उन्होंने स्टार्टअप, लघु एवं मध्यम उद्यमों और नवाचार-आधारित विकास को समर्थन देने में मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की क्षमता को उजागर किया।
ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने स्थिर और नियम-आधारित व्यापार को बढ़ावा देने में एफटीए की भूमिका का उल्लेख किया, जिससे न्यूजीलैंड को गतिशील बाजारों में विविध अवसर प्राप्त होते हैं।