भूजल प्रबंधन और मूल्यांकन
समिति और रिपोर्ट का संक्षिप्त विवरण
भूजल विभाग और भूजल संसाधन आकलन (GWRA) पर राज्य स्तरीय समिति भूजल पुनर्भरण बढ़ाने, परीक्षण विधियों में सुधार करने और जन जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देती है। फसलों पर प्रतिबंध लगाना भूजल समस्याओं का समाधान नहीं माना जाता है।
- सचिव (सिंचाई एवं कमान क्षेत्र विकास) : ई. श्रीधर समिति का नेतृत्व करते हैं।
- GWRA की 2025 की रिपोर्ट में सूखे की स्थिति और घटते भूजल स्तर के कारण रबी मौसम में धान की फसल को हतोत्साहित करने का सुझाव दिया गया है।
भूजल उपयोग के आँकड़े
- कृषि उपयोग : भूजल का 90%।
- घरेलू उपयोग : 6%।
- औद्योगिक उपयोग : 4%।
मंडलों का वर्गीकरण और परिवर्तन
- अतिशोषण वाले मंडलों की संख्या 31 से घटकर 23 हो गई है।
- 25 मंडलों को अर्ध-गंभीर श्रेणी में और 5 मंडलों को गंभीर श्रेणी में स्थानांतरित कर दिया गया है।
- जल निकासी कुओं में 16% की वृद्धि दर्ज की गई।
- 24% मंडलों को नीतिगत हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
सुझाई गई पहलें
- क्षेत्र-केंद्रित भूजल मापन द्वारा ग्राम-स्तर पर संरक्षण।
- रबी के मौसम में बोरवेल का उपयोग करके धान जैसी अधिक पानी की खपत वाली फसलों की खेती पर प्रतिबंध।
- सरकारी प्रोत्साहनों को हटाकर बोरवेल के जरिए धान की खेती करने वाले किसानों को दंडित करना।
- भूजल स्तर को बनाए रखने के लिए फसल परिवर्तन को प्रोत्साहित करना।
श्रीधर की टिप्पणियाँ
श्री श्रीधर ने कृषि को प्राथमिकता देते हुए जल निकासी की उच्च लागत के बावजूद जल प्रबंधन के महत्व पर बल दिया। महात्मा गांधी कालवाकुर्थी लिफ्ट सिंचाई योजना का उदाहरण देते हुए उन्होंने कृषि को प्राथमिकता देने के रणनीतिक निर्णय की आवश्यकता पर बल दिया।
भविष्य की योजनाएं
- 2026 के लिए GWRA की शुरुआत मई में डेटा संग्रह के साथ होगी।
- दूसरी समिति की बैठक में अगस्त में अनुमोदन होने की संभावना है।