UAE का OPEC और OPEC+ से बाहर निकलना
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने 1 मई से पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) और OPEC+ से बाहर निकलने के अपने निर्णय की घोषणा की है, जो वैश्विक तेल परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
बाहर निकलने के कारण
- रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण: संयुक्त अरब अमीरात के ऊर्जा मंत्रालय ने अपने दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण तथा विकसित हो रही ऊर्जा प्रोफ़ाइल को प्रमुख कारणों के रूप में उद्धृत किया।
- घरेलू ऊर्जा में निवेश: यह निर्णय घरेलू ऊर्जा उत्पादन में त्वरित निवेश के अनुरूप है।
- वैश्विक ऊर्जा भूमिका: UAE का लक्ष्य वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अपनी जिम्मेदार और विश्वसनीय भूमिका को मजबूत करना है।
OPEC में UAE का ऐतिहासिक संदर्भ
- संयुक्त अरब अमीरात 1967 में अबू धाबी अमीरात के माध्यम से OPEC में शामिल हुआ।
- यह 1971 में एक स्वतंत्र देश बन गया और इसकी सदस्यता जारी रही।
- फरवरी तक, संयुक्त अरब अमीरात सऊदी अरब और इराक के बाद OPEC में तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक था।
निकास के बाद की भविष्य की योजनाएँ
- UAE की योजना मांग और बाजार की स्थितियों के अनुरूप धीरे-धीरे अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में लाने की है।
OPEC और OPEC+
- गठन: OPEC की स्थापना 1960 में सऊदी अरब, ईरान, इराक, वेनेजुएला और कुवैत द्वारा की गई थी।
- विस्तार: OPEC में अब संयुक्त अरब अमीरात सहित 12 सदस्य देश हैं।
- 2016 में, OPEC+ का गठन हुआ, जिसमें रूस सहित 10 अन्य तेल उत्पादक देश शामिल हुए।
- उद्देश्य: सदस्य देशों की पेट्रोलियम नीतियों में समन्वय और एकीकरण करना तथा कुशल आपूर्ति और उचित प्रतिफल के लिए तेल बाजार में स्थिरता सुनिश्चित करना।