वैश्विक संस्थानों में तत्काल सुधार
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में स्थापित वैश्विक संस्थानों में तत्काल सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने तर्क दिया कि:
- मौजूदा ढांचों को वर्तमान सुरक्षा वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना होगा।
- अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित संस्थानों को समकालीन खतरों से निपटने में अधिक प्रभावी बनना चाहिए।
- वैश्विक दक्षिण के देशों को अधिक प्रतिनिधित्व प्रदान किया जाना चाहिए।
आतंकवाद और कूटनीति पर रुख
मॉस्को में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा मंच में अपने भाषण के दौरान, डोवाल ने आतंकवाद और अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा पर महत्वपूर्ण बयान दिए:
- उन्होंने आतंकवाद से लड़ने में एकसमान मानकों की आवश्यकता पर जोर दिया और दोहरे मापदंडों से बचने की बात कही।
- जिम्मेदार देशों को आतंकवाद के प्रायोजकों का समर्थन करने या उनका मुकाबला करने के संबंध में स्पष्ट विकल्प चुनने की आवश्यकता है।
- होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक जलमार्गों से निर्बाध नौवहन व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है।
भू-राजनीतिक चिंताएँ और व्यापारिक गतिविधियाँ
डोवाल ने निर्बाध व्यापारिक आवागमन के महत्व पर प्रकाश डाला, विशेष रूप से महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों के माध्यम से:
- उन्होंने पश्चिम एशिया में सुरक्षा स्थिति पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया।
- बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर से सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत-रूस साझेदारी
राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री डोवाल ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई शोइगु से मुलाकात के दौरान भारत-रूस की बहुआयामी साझेदारी की सराहना की।
- उन्होंने रक्षा, सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक संबंधों में व्यापक सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
- जून के अंत में नई दिल्ली में होने वाली आगामी ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) बैठक पर विचारों का आदान-प्रदान किया गया।