प्रहार: राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति (PRAHAAR: National Counter-Terrorism Policy & Strategy) | Current Affairs | Vision IAS

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प्रहार: राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति (PRAHAAR: National Counter-Terrorism Policy & Strategy)

31 Mar 2026
1 min

In Summary

  • गृह मंत्रालय ने भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी नीति, प्रहार का अनावरण किया, जो रोकथाम, प्रतिक्रिया और लचीलेपन के लिए सात स्तंभों वाला ढांचा है।
  • प्रहार एमएसी/जेटीएफआई के माध्यम से खुफिया जानकारी साझा करने, एनएसजी द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया, संपूर्ण सरकारी क्षमता निर्माण और मानवाधिकारों के पालन पर जोर देता है।
  • इसका उद्देश्य आतंकवाद के कारणों को कम करना, अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को समन्वित करना और सामुदायिक सहभागिता और पुनर्एकीकरण के माध्यम से सामाजिक लचीलेपन को बढ़ावा देना है।

In Summary

सुर्खियों में क्यों?

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) ने भारत की पहली राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति एवं रणनीति 'प्रहार' का अनावरण किया।

प्रहार के बारे में

प्रहार एक सात-स्तंभीय ढांचा प्रस्तुत करता है:

  • (P) आतंकी हमलों की रोकथाम {(P)revention of Terror Attacks}:  
    • सक्रिय, "खुफिया-आधारित" दृष्टिकोण, जिसमें मल्टी एजेंसी सेंटर (MAC) और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) के अंतर्गत संयुक्त खुफिया कार्यबल (JTFI) वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने के केंद्रीय मंच के रूप में कार्य करते हैं।
    • भारतीय सीमा सुरक्षा बलों (रक्षा विभाग, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल) और आव्रजन प्राधिकरणों के लिए अत्याधुनिक उपकरण एवं प्रौद्योगिकियां, ताकि भारतीय सीमाओं को सुरक्षित किया जा सके।
    • भारतीय अर्थव्यवस्था के महत्वपूर्ण क्षेत्रों, जिनमें विद्युत, रेलवे, विमानन, बंदरगाह, रक्षा, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा शामिल हैं, को राज्य/गैर-राज्य अभिकर्ताओं से सुरक्षित रखने के लिए क्षमताओं का विकास करना।
  • (R) खतरे के अनुरूप त्वरित एवं अनुपातिक प्रतिक्रिया {(R)esponses swift and proportionate to the threat posed}; 
    • स्थानीय पुलिस प्राथमिक प्रतिक्रिया देने वाली संस्था है, जिसे विशेषीकृत राज्य एवं केंद्रीय आतंकवाद-रोधी बलों द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
    • राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (NSG) गृह मंत्रालय के अधीन नोडल राष्ट्रीय आतंकवाद-विरोधी बल है, जो बड़े आतंकी हमलों के दौरान राज्य बलों की सहायता करता है।
    • गृह मंत्रालय द्वारा समन्वय के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), जिसमें MAC प्लेटफॉर्म के माध्यम से खुफिया जानकारी का प्रसार, विश्लेषण और अनुवर्ती कार्रवाई शामिल है।
  • (A) सरकार के समग्र दृष्टिकोण में आंतरिक क्षमताओं का एकत्रीकरण {(A)ggregating internal capacities in a whole-of-government approach}; यह नवीनतम उपकरणों, प्रौद्योगिकियों और हथियारों को प्राप्त करके सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के आधुनिकीकरण पर जोर देता है।
    • इसके अतिरिक्त, एजेंसियां ​​ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (BPR&D) तथा NSG जैसे संस्थानों द्वारा संचालित विशेष सामरिक प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं।
  • (H) मानवाधिकार और विधि के शासन पर आधारित प्रक्रियाएं {(H)uman Rights and Rule of Law Based Processes}; 
    • खतरों का निवारण न्यायसंगत कानूनी प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाता है, जो मूल मानवाधिकारों की रक्षा करते हैं, और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों का समाधान विशेष रूप से मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 द्वारा किया जाता है।
    • आतंकवाद से संबंधित अपराधों से निपटने के लिए विशेष कानून - गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908, शस्त्र अधिनियम 1959 और धन शोधन रोकथाम अधिनियम, 2002।
  • (A) आतंकवाद के अनुकूल परिस्थितियों को कम करना {(A)ttenuating the conditions conducive to Terrorism]; 
    • भारतीय खुफिया और कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​लगातार आतंकवादी समूहों की मंसूबों को नाकाम कर रही हैं।
    • कट्टरपंथी युवाओं के विरुद्ध पुलिस द्वारा चरणबद्ध कार्रवाई की जाती है, जिसका उद्देश्य बहु-हितधारक परिवेश में कट्टरपंथ और हिंसक उग्रवाद की समस्या का व्यापक समाधान करना है।
    • उग्रवादी विचारधाराओं का प्रतिकार करने के लिए सामुदायिक नेताओं, गैर सरकारी संगठनों और उदारवादी उपदेशकों के साथ सक्रिय रूप से जुड़ना।
  • (A) अंतर्राष्ट्रीय प्रयासों का संरेखित एवं स्वरूप निर्धारण {(A)ligning and Shaping the International Efforts}; भारत ने सूचना/साक्ष्य साझा करने और अन्य विधिक सहयोग के लिए विदेशी भागीदारों के साथ पारस्परिक विधिक सहायता संधि (MLAT), प्रत्यर्पण संधि/प्रत्यर्पण व्यवस्था (ET/EA), संयुक्त कार्य समूह (JWG) जैसे विभिन्न समझौतों में प्रवेश किया है।
  • (R) समग्र समाज आधारित दृष्टिकोण के माध्यम से पुनर्प्राप्ति और लचीलापन {(R)ecovery and Resilience through a whole-of-society approach}; सरकार प्रभावित समुदाय को जागरूक करने और उन्हें समाज में पुनः एकीकृत करने के लिए डॉक्टरों, मनोवैज्ञानिकों, अधिवक्ताओं और नागरिक समाज के अन्य सदस्यों, जिनमें गैर सरकारी संगठन, धार्मिक और सामुदायिक नेता शामिल हैं, की एक टीम को नियुक्त करती है।

आगे आवश्यक सुधार:

  • खुफिया जानकारी जुटाने एवं जांच के लिए विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग और समन्वय को सुदृढ़ करें।
  • उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए समय-समय पर घरेलू आतंकवाद-रोधी विधिक ढांचे में संशोधन करें।
  • राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों की ATS इकाइयों की निरंतर क्षमता निर्माण की आवश्यकता है, जिसमें एक समान संरचना, संसाधन, प्रशिक्षण और जांच पद्धतियां शामिल हों।
  • आतंकवादियों के विरुद्ध मजबूत मामले बनाने के लिए FIR दर्ज करने से लेकर अभियोजन तक विधि विशेषज्ञों को शामिल किया जाना चाहिए।

निष्कर्ष

प्रहार (PRAHAAR) भारत को एक सक्रिय, खुफिया जानकारी पर आधारित आतंकवाद-रोधी रणनीति की ओर अग्रसर करता है, जिसमें बेहतर समन्वय और सुरक्षा उपाय शामिल हैं।। इसकी सफलता निरंतर सुधारों, विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय और बदलते खतरों से निपटने के लिए अनुकूल विधियों पर निर्भर करती है।

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FIR (प्रथम सूचना रिपोर्ट)

यह किसी संज्ञेय अपराध की सूचना पुलिस में दर्ज की जाने वाली पहली औपचारिक रिपोर्ट होती है। आतंकवाद से संबंधित मामलों में, एक मजबूत FIR दर्ज करना अभियोजन पक्ष के लिए मामला बनाने हेतु महत्वपूर्ण है।

ATS (एंटी-टेररिस्ट स्क्वाड)

यह राज्य पुलिस बलों की विशेष इकाइयाँ हैं जो आतंकवाद से संबंधित अपराधों की जांच और रोकथाम के लिए जिम्मेदार होती हैं। आतंकवाद-रोधी रणनीति (जैसे प्रहार) में इनकी क्षमता निर्माण पर जोर दिया गया है।

प्रत्यर्पण संधि/प्रत्यर्पण व्यवस्था (ET/EA)

ये वे संधियां या व्यवस्थाएं हैं जिनके तहत एक देश दूसरे देश से ऐसे व्यक्ति को सौंपने का अनुरोध कर सकता है जिस पर उसके अधिकार क्षेत्र में अपराध करने का आरोप है या उसे दोषी ठहराया गया है। यह आतंकवादियों और अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए महत्वपूर्ण है।

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