अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की इस रिपोर्ट में उन राज्यों के सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की उत्पादकता की तुलना की गई है जिन्होंने डिजिटलीकरण आधारित सुधारों को अपनाया है।
- जिन राज्यों ने इन सुधारों को अधिक लागू किया, वहां कुल कारक उत्पादकता (Total Factor Productivity-TFP) उच्च दर्ज की गई।
- कुल कारक उत्पादकता: कुल कारक उत्पादकता का अर्थ है कम संसाधनों से अधिक उत्पादन और आय सृजित करने की क्षमता।
MSMEs का महत्व
- आर्थिक महत्व: MSMEs का भारत के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 30% और देश के विनिर्माण उत्पादन में लगभग 35% का योगदान है।
- रोजगार सृजन: MSMEs देश में लगभग 60% रोजगार प्रदान करते हैं।
- निर्यात को बढ़ावा: MSMEs भारत के कुल निर्यात में लगभग 45% योगदान करते है (2023-24 में)।
- ग्रामीण विकास: कृषि-आधारित और ग्रामीण MSMEs ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करते हैं। ये कृषि-प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रकों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न करके मजबूरी में होने वाले पलायन को कम करते हैं।
- महिला सशक्तिकरण: महिलाओं द्वारा संचालित MSMEs लैंगिक समावेशी विकास को बढ़ावा देते हैं और महिलाओं को आर्थिक व सामाजिक रूप से आगे बढ़ने के अवसर प्रदान करते हैं।
MSMEs को बढ़ावा देने हेतु सरकारी पहलें
- पीएम विश्वकर्मा योजना: इसका उद्देश्य कारीगरों और शिल्पकारों के उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता और बाजार तक पहुंच बढ़ाना तथा उन्हें घरेलू और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं के साथ एकीकृत करना है।
- प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP): इसका उद्देश्य गैर-कृषि क्षेत्रकों में सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के माध्यम से रोजगार के अवसर उत्पन्न करना है।
- पारंपरिक उद्योगों के उन्नयन एवं पुनर्निर्माण के लिए कोष की योजना (SFURTI): इसका उद्देश्य पारंपरिक कारीगरों को समूहों या क्लस्टरों में संगठित करना है।
- सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए सार्वजनिक खरीद नीति: इस नीति के तहत केंद्र सरकार के मंत्रालयों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (CPSEs) को अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 25% हिस्सा सूक्ष्म और लघु उद्यमों (MSEs) से खरीदना अनिवार्य किया गया है।