भारत में महिलाओं की रोजगार क्षमता का विरोधाभास
AISHE 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, महिलाओं के उच्च शिक्षा नामांकन में उल्लेखनीय 28% की वृद्धि के बावजूद, भारत एक महत्वपूर्ण चुनौती का सामना कर रहा है, जहां स्नातक होने वाली महिलाओं में से केवल 34-37% को ही रोजगार योग्य माना जाता है, जैसा कि टीमलीज़ डिग्री अप्रेंटिसशिप (TLDA) की "हर पाथ, हर पावर" रिपोर्ट में उजागर किया गया है।
प्रमुख आँकड़े और क्षेत्रीय विश्लेषण
- समग्र रोजगार क्षमता: जनसंख्या का 48% हिस्सा होने के बावजूद, महिलाएं सकल घरेलू उत्पाद में केवल 18% का योगदान देती हैं।
- क्षेत्रवार रोजगार क्षमता:
- IT और सॉफ्टवेयर: 36% रोजगार क्षमता
- BFSI (बैंकिंग, वित्तीय सेवाएं और बीमा): 40% रोजगार क्षमता
- खुदरा और बिक्री: 42% रोजगार क्षमता
- स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रक: संरचित प्रशिक्षण और कौशल अनुकूलन के कारण 55-60% रोजगार क्षमता।
- इंजीनियरिंग: रोजगार क्षमता केवल 22% है, जो तकनीकी क्षेत्रों में महत्वपूर्ण चुनौतियों को दर्शाती है।
असमानताएं और चुनौतियां
- आय असमानता: समान भूमिकाओं के लिए महिलाएं पुरुषों की तुलना में 20-35% कम कमाती हैं, जबकि नेतृत्व पदों में यह अंतर 28% तक देखा जाता है।
- महिला श्रम बल भागीदारी: लगभग 31.7%, जो वैश्विक औसत लगभग 50% से काफी कम है।
- शहरी भागीदारी: उच्च शैक्षिक उपलब्धियों के बावजूद, यह और भी कम होकर लगभग 22% रह गई है।
- क्षेत्रीय एकाग्रता: अधिक योग्यता होने के बावजूद, महिलाएं अक्सर कम वेतन वाले क्षेत्रों में ही काम करती हैं।
कॉर्पोरेट सीढ़ी और शिक्षुता कार्यक्रम
- कॉर्पोरेट प्रतिनिधित्व:
- प्रवेश स्तर: 31% महिलाएं
- कार्यकारी स्तर: 17% महिलाएं
- कॉर्पोरेट बोर्ड में 20% महिलाएं
- शिक्षुता कार्यक्रम:
- लगभग 98% प्रशिक्षु औपचारिक रोजगार में शामिल हो जाते हैं।
- 38% कंपनियों ने बताया कि उनके पास कोई महिला प्रशिक्षु नहीं है, जो अप्रयुक्त क्षमता को दर्शाता है।
- तीन वर्षों में महिला प्रशिक्षुओं के नामांकन में 58% की वृद्धि हुई है, विशेष रूप से IT, खुदरा और ऑटोमोटिव जैसे क्षेत्रों में।
- अल्पउपयोग वाले क्षेत्रों में BFSI, स्वास्थ्य सेवा और लॉजिस्टिक्स शामिल हैं।
भौगोलिक अंतर्दृष्टि और भविष्य के अवसर
- प्रमुख शहर: हैदराबाद, मुंबई और बेंगलुरु, जिनमें से हैदराबाद में 2024 में 42% महिला प्रशिक्षु थीं।
- लगातार प्रगति: कोलकाता और चेन्नई जैसे शहर भी तरक्की कर रहे हैं।
- कौशल अंतराल और समाधान:
- विनिर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और दूरसंचार क्षेत्रों में 40-50% कौशल की कमी है।
- IT, ऑटोमोटिव और हेल्थकेयर जैसे उच्च विकास वाले उद्योगों को नौकरी के लिए तैयार प्रतिभाओं की आवश्यकता होती है।
- सुनियोजित शिक्षुता कार्यक्रम व्यावहारिक कौशल को बढ़ा सकते हैं और रोजगार क्षमता में सुधार कर सकते हैं।