SEBI और NSE के बीच हुए समझौते का अवलोकन
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) द्वारा को-लोकेशन और डार्क फाइबर से संबंधित मुद्दों के निपटारे के लिए दायर आवेदनों को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस कदम से NSE के लंबित प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (IPO) आवेदन की मंजूरी में तेजी आने की उम्मीद है।
समझौते का विवरण
- यह समझौता वर्तमान में SEBI के भीतर विभिन्न समितियों द्वारा समीक्षाधीन है।
- NSE ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के लिए कुल 1,387.39 करोड़ रुपये के दो निपटान आवेदन प्रस्तुत किए।
- 30 सितंबर, 2025 को समाप्त तिमाही में इन मामलों के लिए 1,297.41 करोड़ रुपये का प्रावधान अलग रखा गया था।
सह-स्थान और डार्क फाइबर
- एक को-लोकेशन सुविधा स्टॉक ब्रोकरों को डेटा सेंटर सेवाएं प्रदान करती है।
- डार्क फाइबर से तात्पर्य उन अप्रयुक्त ऑप्टिकल केबलों से है जिनका उपयोग तेज डेटा ट्रांसमिशन के लिए किया जा सकता है।
आरोप और नियामक कार्रवाई
- को-लोकेशन और डार्क फाइबर के माध्यम से कुछ ब्रोकरों को तरजीही पहुंच प्रदान किए जाने के आरोप सामने आए।
- इस मुद्दे को सर्वप्रथम जनवरी 2015 में एक मुखबिर द्वारा उजागर किया गया था।
भविष्य के नियामक विकास
- पांडे ने संकेत दिया कि SEBI जल्द ही NSE को IPO के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी कर सकती है।
- SEBI गैर-सूचीबद्ध शेयर बाजार के विनियमन के संबंध में कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के साथ चर्चा कर रहा है।
- गैर-सूचीबद्ध शेयर बाजार में निगरानी का अभाव होता है और आमतौर पर छोटे निवेशक समूहों के बीच इसका कारोबार खुलेआम होता है।
चिंताएँ और अपेक्षाएँ
- IPO प्रस्ताव दस्तावेजों में दी गई जानकारियों में बार-बार कमियां देखी गईं, जिससे पारदर्शिता और समझने में बाधा उत्पन्न हुई।
- SEBI को पूंजी संरचना, व्यवसाय मॉडल और राजस्व एवं लागत के कारकों पर स्पष्ट खुलासे की अपेक्षा है।