घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24: तंबाकू उपभोग संबंधी अंतर्दृष्टि
HCES, 2023-24 से पता चलता है कि भारत में तंबाकू की खपत में काफी वृद्धि हुई है, विशेष रूप से गरीब परिवारों में, जिसके स्वास्थ्य परिणामों और सार्वजनिक स्वास्थ्य नीतियों के लिए गंभीर निहितार्थ हैं।
तंबाकू सेवन के रुझान
- ग्रामीण भारत :
- 2011-12 और 2023-24 के बीच प्रति व्यक्ति तंबाकू पर होने वाला खर्च 58% बढ़ गया।
- तंबाकू का सेवन करने वाले परिवारों की संख्या 9.9 करोड़ (59.3%) से बढ़कर 13.3 करोड़ (68.6%) हो गई।
- यह वृद्धि मुख्य रूप से गुटखा और पत्तीदार तंबाकू के बढ़ते उपयोग के कारण है।
- ग्रामीण क्षेत्रों में गुटखा का उपयोग घरों के 5.3% से बढ़कर 30.4% हो गया।
- शहरी भारत :
- इसी अवधि में तंबाकू पर प्रति व्यक्ति खर्च में 77% की वृद्धि हुई।
- तंबाकू का सेवन करने वाले परिवारों की संख्या 2.8 करोड़ (34.9%) से बढ़कर 4.7 करोड़ (45.6%) हो गई।
- सिगरेट की खपत में तेजी से वृद्धि हुई है, और 18.1% परिवार सिगरेट का सेवन करते हैं।
- गुटखा का उपयोग शहरी बाजारों में भी फैल गया है, जहां 16.8% परिवार इसका सेवन करते हैं।
भौगोलिक और जनसांख्यिकीय पैटर्न
- गुटखा का सेवन भारत के मध्य क्षेत्र (जैसे मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश) में अधिक प्रचलित है।
- पूर्वोत्तर और दक्षिणी राज्यों में गुटखा के उपयोग का प्रचलन अधिक है।
- गरीब परिवार इससे असमान रूप से प्रभावित होते हैं, क्योंकि आय के मामले में सबसे निचले 40% में आने वाले ग्रामीण परिवारों में से 70% से अधिक लोग तंबाकू का सेवन करते हैं।
स्वास्थ्य और आर्थिक निहितार्थ
- स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, तंबाकू गैर-संक्रामक रोगों का एक प्रमुख कारण है, जिसके कारण प्रतिवर्ष 13 लाख मौतें होती हैं।
- तंबाकू से संबंधित स्वास्थ्य लागत में वृद्धि के कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार (जैसे आयुष्मान भारत) खतरे में है।
- वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2022 तक कुल स्वास्थ्य व्यय में सरकारी स्वास्थ्य व्यय 29% से बढ़कर 48% हो गया।
नीतिगत सिफारिशें और चुनौतियाँ
- केवल तंबाकू उत्पादों पर शुल्क बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है; अधिक कठोर नियामक निगरानी आवश्यक है।
- सेलिब्रिटीज द्वारा सरोगेट विज्ञापन को कम करने की जरूरत है।
- घरेलू बजट से पता चलता है कि गरीब ग्रामीण परिवार शिक्षा की तुलना में तंबाकू पर अधिक खर्च करते हैं, जो मानव पूंजी विकास के लिए एक चुनौती पेश करता है।
HCES, 2023-24 के आंकड़े नीति निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण चेतावनी के रूप में काम करते हैं ताकि तंबाकू की बढ़ती खपत और स्वास्थ्य और राजकोषीय स्थिरता पर इसके प्रभावों को संबोधित किया जा सके।