उन्नत प्रौद्योगिकियों पर वैश्विक सहयोग
उन्नत प्रौद्योगिकियों पर वैश्विक सहयोग में प्रगति के साथ, भारत को अमेरिका के नेतृत्व वाली पैक्स सिलिका जैसी पहलों में अपनी भागीदारी के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लेने होंगे।
भारत के लिए रणनीतिक विचार
- संप्रभुता संबंधी चिंताएं: पैक्स सिलिका में शामिल होने को लेकर भारत की आशंकाएं रणनीतिक स्वायत्तता के प्रति उसकी प्रतिबद्धता और भू-राजनीतिक माहौल से उपजी हैं।
- कूटनीतिक निहितार्थ: शामिल होने के निमंत्रण को अस्वीकार करना ट्रम्प प्रशासन द्वारा एक कूटनीतिक अपमान के रूप में देखा जा सकता है, जिससे संभवतः टैरिफ में वृद्धि हो सकती है या व्यापार समझौते खतरे में पड़ सकते हैं।
औद्योगिक नीति और साझेदारी
पैक्स सिलिका में भागीदारी का मतलब सिर्फ एक निर्भरता को दूसरी से बदलना नहीं होना चाहिए। भारत को निम्नलिखित बातों पर ध्यान देना होगा:
- सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर घरेलू नीतियों को मजबूत करना।
- पैक्स सिलिका के मौजूदा सदस्यों सहित विभिन्न देशों के साथ साझेदारी का निर्माण करना।
- यह सुनिश्चित करना कि राजनीतिक वादे ठोस परियोजनाओं में परिणत हों।
रणनीतिक लाभ के रूप में सहयोग
- फ्रांस जैसे देशों के साथ साझेदारी और संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के साथ त्रिपक्षीय सहयोग भारत को रणनीतिक लाभ और सुरक्षा कवच प्रदान करते हैं।
वैश्विक मानकों में भारत की भूमिका
भू-राजनीतिक दरारें और आपूर्ति श्रृंखलाओं में मौजूद कमजोरियां कृत्रिम बुद्धिमत्ता, अर्धचालकों और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को आवश्यक बनाती हैं।
- वैश्विक दक्षिण के देशों को तकनीकी प्रगति में शामिल रखने में भारत की भूमिका महत्वपूर्ण है।
- वैश्विक नियमों और मानकों को निर्धारित करने वाले क्षेत्रों में सक्रिय भागीदारी भारत को उन आवाजों की वकालत करने का अवसर देती है जिनका प्रतिनिधित्व कम होता है।